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LPG सिलेंडर से जुड़ी ये 10 जानकारियां, जान माल के नुकसान से बचा सकती हैं, जानिए

Thu, 03 May 2018 10:00 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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रसोई गैस सिलेंडर
बचाव ही उपाय है, जानिए रसोई गैस सिलेंडर से जुड़ी 10 ऐसी जानकारियां, जो आपको जान और माल के नुकसान से बचा सकती हैं।
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LPG Gas Cylinder
क्या आप जानते हैं कि गैस कनेक्शन लेते ही आपका मुफ्त बीमा हो जाता है। ऐसे में अगर गैस सिलेंडर से कोई हादसा होता है तो आप इंश्योरेंस क्लेम कर सकते हैं। बहुत से लोगों को इसकी जानकारी ही नहीं है। वहीं, गैस एजेंसियां भी ग्राहकों से यह बात साझा नहीं करते। जीरकपुर स्थित इंडेन गैस एजेंसी के मालिक स्वर्ण सिंह ने इसके बारे में बताया।
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cylinder
इश्योरेंस के तहत पीड़ित परिवार को 10 लाख तक का क्लेम मिल सकता है। इश्योरेंस पब्लिक लाइबिलिटी पॉलिसी के तहत होता है, न कि किसी ग्राहक के नाम पर। अगर कोई घटना हो जाए तो आपको अपने एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर को इसकी जानकारी देनी होगी। फिर वह इस संबंध में इश्योरेंस कंपनी को बताएगा और आगे की प्रक्रिया पूरी करवाएगा।

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एलपीजी सिलेंडर
लेकिन आप बीमा का फायदा उठा सकते हैं, लेकिन ऐसा भी तब होगा, जब हादसा कनेक्शन लेते समय दिए गए पते पर हुआ हो। हादसे में अगर कोई व्यक्ति घायल हो जाता है और अस्पताल में भर्ती होता है तो बीमा कंपनी पीड़ित को 25 हजार तक का क्लेम देती है। वहीं मौत होने पर बीमा की पूरी राशि दी जाती है।
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cylinder
हादसे में अगर सुनने की शक्ति चली जाती है तो बीमा का 40 प्रतिशत, हाथ की चारों उंगलियां खोने पर 35 प्रतिशत क्लेम मिल सकता है। अगर हादसे में कई लोगों की मौत होती है तो बीमा कंपनी प्रति व्यक्ति के हिसाब क्लेम दे सकती है। लेकिन बीमा क्लेम करने के लिए स्थानीय थाने में दुर्घटना की सूचना दर्ज करानी होगी। डिस्ट्रीब्यूटर को हादसे की जानकारी देनी होगी।
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cylinder
पब्लिक लाइबिलिटी पॉलिसी के अनुसार, तेल कंपनियों के ग्राहक सिलेंडर ब्लास्ट होने पर मौत हो जाए तो पांच लाख रुपये प्रति व्यक्ति क्लेम कर सकते हैं। इलाज के खर्च के लिए 15 लाख रुपये प्रति घटना क्लेम किया जा सकता है। ब्लास्ट से क्षतिग्रस्त हुई प्रॉपर्टी के लिए एक लाख रुपये तक क्लेम किया जा सकता है।
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lpg
एलपीजी सिलेंडर ब्लास्ट होने की स्थिति में दस लाख रुपये का थर्ड पार्टी का बीमा होता है। हादसा होने पर इंश्योरेंस कंपनी वाले सर्वे करते हैं और फिर बीमा क्लेम की रकम मिलती है। वहीं अगर ग्राहक आईएसआई मार्क की चीजें यूज नहीं करते हैं और हादसा हो जाता है तो कंपनी इसके लिए जिम्मेदार नहीं होगी।

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lpg
जान लीजिए कि एक रसोई गैस सिलेंडर की जिंदगी अधिकतम 10 साल होती है। उसके बाद निष्प्रयोज्य हो जाता है और अवधि समाप्त होने पर गैस रिफलिंग के बाद यह कभी भी फट सकता है। ऐसे में आपके घर में आने वाले सिलेंडर एक्सपायर डेट के हो सकते हैं, जो खतरनाक हैं। इसलिए जरूरी है कि जब भी सिलेंडर आए तो एक्सपायरी डेट की जांच जरूर कर लें।

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प्रतीकात्मक तस्वीर
ऐसे करें जांच
इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम तीनों ही कंपनियों के एलपीजी सिलेंडर में तीन पत्तियां लगी रहती हैं। इसमें दो पत्तियों पर सिलेंडर का वजन और तीसरी पत्ती में कुछ नंबर लिखे होते हैं। यह वास्तव में सिलेंडर की एक्सपायरी डेट होती है। आप एक्सपायरी वर्ष को समझ सकता है, लेकिन महीना समझने के लिए साथ लिखे ए, बी, सी और डी का गणित समझना जरूरी है।

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रसोई गैस सिलेंडर
देखा होगा कि सिलेंडर में पट्टी पर ए-10, बी-12 या सी-15, डी-14 लिखा होता है। चारों एल्फाबेट में साल के 12 महीने ग्रुप में बंटे हुए हैं। ए का मतलब जनवरी से मार्च तक, बी का मतलब अप्रैल से जून तक, सी का मतलब जुलाई से सितंबर व डी का मतलब अक्तूबर से दिसंबर तक। ए, बी, सी और डी अंकों के बाद लिखी संख्या एक्सपायरी वर्ष होती है। अब अगर पट्टी पर डी-18 लिखा है तो सिलेंडर दिसंबर 2018 को एक्सपायर हो जाएगा।

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रसोई गैस सिलेंडर
चूल्हे और गैस सिलेंडर में लगी सुरक्षा पाइप का अहम रोल होता है। सुरक्षा पाइप 1.5 मीटर से ज्यादा लंबी या इससे छोटी नहीं होनी चाहिए। 5 साल के बाद सुरक्षा पाइप को बदल देना चाहिए। कई लोग रबड़ वाली पाइप का प्रयोग करते हैं, जो घातक सिद्ध हो सकती है। सुरक्षा पाइप में 5 तरह की परतें होती हैं जो कि इसे सुरक्षित बनाती है। इसलिए इसे सुरक्षा पाइप कहते हैं। इसके साथ-साथ हमेशा चूल्हे को ऊपर रखे और गैस सिलेंडर नीचे रखा होना चाहिए।
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पिथौरागढ़-झूलाघाट मार्ग पर जाम लगाते रसोईगैस उपभोक्ता - फोटो : अमर उजाला
गैस सिलेंडर के आसपास कोई भी ज्वलनशील पदार्थ या फिर बिजली के उपकरण नहीं होने चाहिए। रेगुलेटर को लेकर भी अकसर लोग सावधानी नहीं बरते हैं। रेगुलेटर उसी कंपनी को होना चाहिए जिस कंपनी का सिलेंडर होता है। कंपनी सिलेंडर के मुताबिक ही रेगुलेटर का निर्माण करती है। उन्होंने बताया कि आईएसआई मार्क के चूल्हे का ही इस्तेमाल करना चाहिए और समय-समय पर चूल्हे की सर्विस करवाते रहना चाहिए।
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