केंद्र सरकार के भरसक प्रयासों के बावजूद लोगों ने काले धन को सफेद करने का तरीका निकला ही लिया, वो भी ऐसा कि मोदी जी भी न पकड़ पाएंगे।
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एटीएम के बाहर लगी लाइन
किसानों की फसल मंडी में आ रही है। ब्लैक मनी वाले वे कारोबारी जिनकी खेतिहर जमीन भी हैं वे फर्जी तरीके से जे फार्म निकलवा रहे हैं। जे फार्म पर कुछ प्रतिशत कमीशन का खेल चल रहा है। इसमें छोटे किसान से लेकर मंडी आढ़ती, एंट्री गेट वाले तक शामिल हैं। फर्जी एंट्री भी करवाई जा रही है। इन दिनों कमेटी कार्यालय में जे फार्म की एंट्री जबरदस्त बढ़ोतरी पर है।
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बैंक के बाहर लगी लोगों की कतार
- फोटो : अमर उजाला
जे फार्म एक तरह से एक नंबर में फसल बेचने की रसीद है। यह रसीद लेकर फिर किसान कम कारोबारी अपने सीए के पास ले जाकर रोकड़ में एंट्री करवा रहे हैं। दरअसल जमीन -जायदाद वाले कारोबारी मंडियों में आने वाले छोटे किसानों को उनके नाम से फसल मंडी में लाने की एंट्री करवा रहे हैं। वह एंट्री से लेकर आढ़ती की दुकान पर बेचने तक जिसे जे फार्म दिलवाना है उस जमीन जायदाद वाले कारोबारी के नाम की एंट्री करवा देता है।
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एटीएम पर लगी भीड़
- फोटो : अमर उजाला
जब फसल बिक जाती है तो उसे पक्की रसीद मिल जाती है यानी जे फार्म मिल जाता है। उस जे फार्म को वह किसान संबंधित कारोबारी को दे देता है। उस पर वह अपना कुछ खर्च ले लेता है। इस मामले में मंडियों में फसल लेकर आने वाले ट्रैक्टर चालक व अन्य वाहन चालक भी अच्छी कमाई कर रहे हैं। बड़े खरीदार जिनके पास दो नंबर का पैसा है यानी जिनकी मनी व्हाइट नहीं है वे पुराने नोट लेने पर किसानों को 200 रुपये क्विंटल के हिसाब से अधिक भाव दे रहे हैं।
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एटीएम में भी कैश खत्म
- फोटो : अमर उजाला
उदाहरण के तौर पर इन दिनों कपास के भाव हिसार मंडी में 52 सौ रुपये प्रति क्विंटल है मगर जो किसान पुराने नोट स्वीकार कर रहे हैं उन्हें खरीदार 54 सौ रुपये प्रति क्विंटल के रेट के पैसे दे रहे हैं। इससे खरीदार की मनी कम खर्च में व्हाइट हो रही है। आढ़ती की पेमेंट करंट एकाउंट में से ट्रांजेक्शन करवा देता है। मोटे लेनदेन में व्हाइट मनी होने के बाद वापस लेनदेन हो जाता है।
छोटे किसान अधिकतर जे फार्म नहीं लेते। छोटे किसानों को न ही जे फार्म का महत्व पता होता। वे कभी भी आढ़तियों से पक्की रसीद ही नहीं लेते। आढ़तियों से पहले ही कर्ज उठाए किसान मंडी में फसल भेज रहे हैं। अनाज मंडी एसोसिएशन प्रधान संत कुमार का कहना है कि वैसे जे फार्म ऑनलाइन निकल रहे हैं। इसमें हेराफेरी की कम ही आशंका रहती है। अब छोटे किसान भी समझदार हो गए हैं। वे भी जे फार्म लेकर जाते हैं।