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ये हैं ‘आपरेशन पठानकोट’ के 8वें जांबाज जवान, मिलने पहुंचे मोदी

Mon, 11 Jan 2016 10:01 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़।
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पठानकोट के एयरबेस कैंप आतंकी हमले में शहीद 7 जवानों को हर कोई जान चुका है, लेकिन गरुड़ कमांडो शैलभ को आठवां हीरो कहें तो यह गलत नहीं होगा। देखिए, पूरी खबर।
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आपरेशन पठानकोट में पेट में गोलियां लगने के बाद भी एक घंटे तक लड़ने वाले गरुड़ कमांडो शैलभ पठानकोट के मिलिट्री अस्पताल में दाखिल हैं और उनकी हालत अब खतरे से बाहर बताई जा रही है। पठानकोट पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनसे मिलने के लिए पहुंच चुके हैं। एयरबेस पर हुए आतंकी हमले में आतंकियों को मुंह तोड़ जवाब देते हुए अंबाला के 27 वर्षीय गरुड कमांडो शैलभ गौड़ गंभीर रुप से घायल हो गए थे।
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कमांडो शैलभ गौड़ उसी मोर्चा पर तैनात थे, जहां आतंकियों व एयरफोर्स के गरुड़ कमांडो के बीच आमने-सामने फायरिंग हो रही थी। इस दौरान शैलभ के पेट में 6 गोलियां लगी। गोलियां लगने के बाद भी वह एक घंटे तक आतंकियों से मोर्चा लेते रहे। बाद में शैलभ को मिलेट्री अस्पताल पठानकोट में भर्ती कराया गया। शैलभ अस्पताल के आईसीयू वार्ड में दाखिल हैं।

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भाई वैभव गौड़ ने बताया कि शैलभ के सीओ ने उन्हें 5 जनवरी को सुबह फोन पर शैलभ के घायल होने की  सूचना दी। इसके बाद वह मां मंजुला, पत्नी व बेटी के साथ मिलिट्री अस्पताल पठानकोट पहुंचे। अब शैलभ की हालत खतरे से बाहर बताई गई है। वहीं डॉक्टरों का कहना है, कि लगभग 10 दिन आईसीयू में रखने के बाद  शैलभ सर्जिकल वार्ड में भेजे जा सकते हैं। आगे का इलाज पठानकोट या अंबाला में किया जा सकता है।
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शैलभ के बड़े भाई वैभव ने बताया कि उसके दादा और पिता दोनों एयरफोर्स में थे। उनसे प्रेरित होकर शैलभ ने भी एयरफोर्स में भर्ती होने की ठानी। वर्ष 2010 में शैलभ एयरफोर्स में बतौर गरुड़ कमांडो भर्ती हुए। इसके अलावा शैलभ को मॉडलिंग करने का भी काफी शौक है। वह अपने स्कूल और कालेज के दिनों में मॉडलिंग करते थे। शैलभ की मां मंजुला का कहना है कि बेटे शैलभ की वीरता पर उसे गर्व है।
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