नगर निगम की बुधवार को सदन की बैठक में जब कांग्रेस ने भाजपा पार्षद सतीश कैंथ पर दर्ज मामले पर मेयर को घेरने का प्रयास किया तो दोनो दलों ने एक दूसरे पर जमकर आरोप प्रत्यारोप लगाए। दोनों दलों ने एक दूसरे के पुराने मामले खूब उछाले, ऐसे में जमकर हंगामा हुआ। जब भाजपा ने पूर्व मेयर पूनम शर्मा की अटावा में बिना नक्शे के इमारत निर्माण के साथ- साथ नगर निगम चुनाव में गाड़ी में शराब की बोतलें होने का केस दर्ज होने का मामला उठाया तो पूर्व मेयर पूनम शर्मा ने जमकर हंगामा किया।
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चंडीगढ़ नगर निगम की बैठक
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- फोटो : amar ujala
पूनम शर्मा ने चुनाव में शराब मिलने के मामले में भाजपा पार्षद आशा जसवाल के बेटे पर ही आरोप लगाया कि इस मामले में जसवाल के बेटे ने 5 लाख रुपये लेकर कोर्ट से केस वापस लिया है। मालूम हो कि साल 2012 में हुए नगर निगम चुनाव में वार्ड नंबर-4 में हुए चुनाव में आशा जसवाल और पूनम शर्मा ने एक दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ा था। उस समय सेक्टर-36 में एक गाड़ी से शराब मिली थी।
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इसके बाद पूनम शर्मा के पति पर एक्साइज एक्ट के तहत मामला दर्ज हुआ था। इस मामले में भाजपा पार्षद आशा जसवाल के बेटे ब्रजेश्वर जसवाल शिकायतकर्ता थे। उधर, ब्रजेश्वर जसवाल का कहना है कि उन्होंने समझौता करने के बदले कोई भी राशि नहीं ली है। ब्रजेश्वर जसवाल का कहना कि पूनम शर्मा के पति सरकारी अधिकारी हैं। उनकी अपील पर उन्होंने चुनाव के बाद केस वापस ले लिया था।
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ब्रजेश्वर जसवाल इस समय भाजपा के जिला अध्यक्ष भी है। वहीं, पूर्व मेयर पूनम शर्मा ने सदन में अटावा में बिना नक्शे के इमारत बनाने के मामले में मेयर को कहा कि उन्होंने पैसे से जगह खरीदी है, जबकि भाजपा पार्षद सतीश कैंथ ने बगैर खरीदे विधवा के प्लाट पर कब्जा कर लिया। बैठक में मनोनीत पार्षद एवं रिटायर्ड मेजर डीएस संधू ने रिटायर्ड बिग्रेडयर कुलदीप चांदपुरी पर शहीदी दिवस के आयोजन के मौके पर झूठ बोलने का आरोप लगाया। जब डीएस संधू ने चांदपुरी का नाम लिया तो मेयर ने उन्हें आरोप लगाने और बोलने से मना भी किया, लेकिन संधू नहीं माने।
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संधू ने कहा कि 23 मार्च को टैरेस गार्डन में आयोजित शहीदी दिवस में कुलदीप चांदपुरी ने कहा कि यहां पर स्मारक का निर्माण पूर्व मेयर हरजिंदर कौर के कार्यकाल में हुआ था जबकि यह झूठ है। उन्होंने बताया कि इसका निर्माण साल 2010 में हुआ था। सदन में कांग्रेस पार्षद गुरबख्श रावत ने अन्य पार्षदों के साथ मेयर के खिलाफ जमकर हंगामा किया। गुरबख्श ने सेक्टर-39 में डिस्पेंसरी के निर्माण का प्रस्ताव चर्चा के लिए न आने पर अरुण सूद पर तंज कसा कि वह मेयर बनने लायक नहीं है।
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इस मुद्दे पर सभी कांग्रेस पार्षद मेयर के सामने जमीन पर धरने पर बैठ गए। लेकिन बाद में जब मेयर अरुण सूद डिस्पेंसरी के साढ़े 5 करोड़ रुपये के एजेंडे को ले आए तो कांग्रेस पार्षद अपनी सीट पर वापस गए। लेकिन उस समय मेयर को भाजपा के अपने पार्षदों का गुस्सा झेलना पड़ा। भाजपा पार्षदों ने मेयर से कहा कि ऐसे उनके वार्डों से संबंधित भी कई एजेंडे हैं । इसके बाद भाजपा पार्षदों के दबाव में सदन ने इसको पास नहीं किया।
मेयर अरुण सूद ने कहा कि कांग्रेस पार्षद गुरबख्श रावत बेवजह हंगामा कर रही हैं। उन्होंने कहा कि प्राइमरी स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से नगर निगम के पास नहीं है, ऐसे में डिस्पेंसरी के निर्माण पर साढ़े 5 करोड़ खर्च करने का कोई फायदा नहीं है। लेकिन फिर भी वह दो मंजिल की बजाय एक मंजिल डिस्पेंसरी बनाने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि सेक्टर-49 में डिस्पेंसरी का निर्माण किया गया लेकिन विभाग पूरी तरह से नगर निगम के पास न होने पर अभी तक यह शुरू नहीं हुई है।