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डॉक्टरों के लिए अब विदेश यात्रा पर जाना आसान नहीं, फरमान पढ़ें वरना पछताएंगे

Mon, 12 Jun 2017 09:11 AM IST
संजय कुमार/अमर उजाला, रोहतक(हरियाणा)
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अब डॉक्टरों के लिए विदेश यात्रा पर जाना आसान नहीं होगा। एक सरकारी फरमान जारी किया गया है, ध्यान से पढ़ लें कहीं ऐसा न हो कि पछताना पड़े।
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डेमो - फोटो : demo pic
पीजीआई सहित हरियाणा के सभी मेडिकल कालेजों के डाक्टरों की विदेश का यात्रा का ब्योरा रखा जाएगा। बिना अनुमति कोई भी डाक्टर विदेश यात्रा पर नहीं जा सकेगा। डॉक्टर यदि दवा कंपनियों से टूर स्पांसर करवाएंगे तो उसका भी ब्योरा देना होगा। ऐसा आदेश चिकित्सा शिक्षा और शोध निदेशालय (डीएमईआर) हरियाणा ने सभी मेडिकल कालेजों और हेल्थ विश्वविद्यालय को जारी कर दिया है।

 
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माना जा रहा है कि दवा कंपनियों की ओर से डाक्टरों को कराई जा रही विदेश यात्राओं पर अंकुश लगाने के लिए यह कदम उठाया गया है। विभाग ने पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय रोहतक, शहीद हसन खान गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज मेवात, भगत फूल सिंह महिला मेडिकल कॉलेज खानपुर कलां, केसीजीएमसी करनाल, एमएमएसी अग्रोहा के निदेशकों को पत्र भेज दिया है।

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चिकित्सक
इसके साथ ही एक प्रोफार्मा भी भेजा गया है, जिसमें डॉक्टरों की सभी प्रकार की यात्राओं का विवरण दर्ज किया जाएगा। इसमें डॉक्टर नाम, पद, विभाग, पे स्केल, किस देश में जा रहे हैं आदि का ब्योरा देना होगा। साथ ही, यात्रा की अवधि, अवकाश मंजूर है या नहीं आदि की जानकारी देनी होगी। डॉक्टर को बताना होगा कि वह यात्रा के दौरान कहां रुके, होटल या परिचित का पता देना होगा।
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विभाग ने हवाई टिकट, लोकल परिवहन, होटल में रुकने के बिल के साथ जानकारी देनी होगी। यह भी कि वह अकेला गया था या परिवार के साथ। पहली और अब तक की यात्रा के साथ, यात्रा का खर्च वहन करने वाली कंपनी, संगठन का भी ब्योरा देना होगा। विदेश यात्रा से संबंधित जारी नए आदेश से डॉक्टरों में खलबली है।
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कहा जाता है कि कई दवा कंपनियां डॉक्टरों और उनके परिवार को विदेश यात्रा पर भेजती हैं, ताकि डाक्टर उनकी दवाओं को इस्तेमाल करने के लिए मरीजों को लिखें या सलाह दें। जानकारों की माने तो सरकारी डॉक्टर चार साल में एक बार इंटरनेशनल और एक साल में दो बार नेशनल विजिट कर सकते हैं। लेकिन वह फैकेल्टी बनकर जाएंगे, न कि अटैंड करने के लिए।
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