मोदी सरकार के 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान' की धज्जियां पंचकूला के एक गांव में उड़ती दिखाई दे रही हैं, जहां 10वीं पास करते ही बेटियां पढ़ाई छोड़ने पर मजबूर हैं। तस्वीरों में देखिए, पूरा मामला।
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ऐसा गांव, जहां 10वीं पास करते ही बेटियां छोड़ देती हैं पढ़ाई
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ये गांव है पंचकूला जिले के मोरनी कस्बे का गांव खेतपराली। जहां दर्जनों लड़कियां दसवीं के बाद पढ़ाई छोड़ने को मजबूर हैं। कारण, गांव खेतपराली के सरकारी स्कूल में दसवीं तक की पढ़ाई की ही सुविधा है।
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ऐसा गांव, जहां 10वीं पास करते ही बेटियां छोड़ देती हैं पढ़ाई
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ग्रामीणों ने बताया कि खेतपराली में लड़कियों के लिए बारहवीं तक की पढ़ाई की सुविधा नहीं होने से उन्हें रत्तेवाली के लिए जाना पड़ता है। एक तरह से कहा जाए तो आगे पढ़ने के लिए 12 से 14 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है।
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पिछले साल पास 58 स्टूडेंट्स में से 25 लड़कियां थीं, लेकिन इनमें से पांच ही ग्यारहवीं में दाखिला लेकर अपनी पढ़ाई जारी रख सकीं। बाकी 20 लड़कियों के अभिभावकों ने उन्हें आगे पढ़ने नहीं भेजा।
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आगे पढ़ाई जारी न रखने के पीछे एक कारण ये भी है कि आगे की पढ़ाई के लिए स्कूल जाने का रास्ता बरसाती नदी से होकर है। इस क्षेत्र के लिए दिनभर में एक या दो बसें ही आती-जाती हैं। इस समस्या से परेशान दर्जनों ग्रामीण बुधवार को उपायुक्त के पास ज्ञापन देने पहुंचे।
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गांव की अंजलि ने बताया कि दसवीं के बाद पढ़ने के लिए काफी दूरी पैदल तय करना मुश्किल है। अभिभावकों ने भी इसके लिए मना कर दिया, क्योंकि लौटते हुए रास्ते में बसों की कमी के अलावा कई परेशानियां होती हैं। सोनिया ने बताया कि वह आगे पढ़ाई जारी नहीं रख पाने के कारण दुखी है। सरकार को लड़कियों की पढ़ाई के लिए व्यवस्था करनी चाहिए।
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ग्रामीणों ने बताया कि खेतपराली के स्कूल में दूधगढ़, डाडवाली, खोपर, खैरी सहित दस गांवों के बच्चे आते हैं, लेकिन दसवीं से आगे की पढ़ाई की सुविधा नहीं होने से लड़कियों को परेशानी होती है। आगे पढ़ने के लिए 12 से 14 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है।