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प्यारे लाल वडालीः कभी स्कूल का मुंह नहीं देखा, पहलवानी छोड़ी और फिर...एक से एक गाने

Mon, 12 Mar 2018 09:20 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, अमृतसर(पंजाब)
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प्यारे लाल वडाली
कभी स्कूल का मुंह नहीं देखा, पहलवानी करते थे लेकिन पिता ने वो भी छुड़वा दी...पर हिम्मत नहीं छोड़ी। जानिए प्यारे लाल वडाली के बारे में सब कुछ।
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प्यारे लाल वडाली
सूफी गायकी से दुनिया भर में करोड़ों लोगों का दिल जीतने वाले वडाली ब्रदर्स की जोड़ी टूट गई है। क्योंकि मशहूर सूफी गायक प्यारे लाल वडाली नहीं रहे। शुक्रवार 9 मार्च 2018 को पंजाब के अमृतसर में दिल का दौरा पड़ने से उनका देहांत हो गया। प्यारेलाल पिछले कुछ वक्त से बीमार चल रहे थे।
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प्यारे लाल वडाली
प्यारेलाल, अपने बड़े भाई पूरनचंद वडाली के साथ ही गाया करते थे। प्यारेलाल, पूरनचंद को ही अपना गुरु मानते थे। उनकी जोड़ी ने दुनियाभर में अपनी गायकी से एक अलग मुकाम बनाया था। वडाली ब्रदर्स का मशहूर पटियाला घराने से भी ताल्लुक रहा।

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पूरणचंद वडाली बताते हैं कि हम दोनों भाइयों ने पहलवानी भी की। करीब ढाई दशक तक अखाड़ा ही हमारे लिए सब कुछ था। हमनें जमकर पहलवानी की और कई खिताब भी जीते। लेकिन पिता ठाकुरदास वडाली ने पहलवानी छोड़ने और संगीत सिखने के लिए कहा और हमें बात माननी पड़ी।
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प्यारे लाल वडाली
पूरणचंद ने बताया कि शुरु में पिता ने संगीत की शिक्षा दी। उसके बाद पंडित दुर्गादास और उस्ताद बड़े गुलाम अली खान, पटियाला घराना से स्वर साधना सीखी। 1975 में जालंधर के गांव हरवल्लभ में हमने पहली बार प्रस्तुति दी थी।
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पूरनचंद वडाली ने बताया कि हम भाइयों ने बुल्ले शाह, कबीर, अमीर खुसरो और सूरदास के पदों को सुरों में पिरोया। गुरबानी के अलावा गजल और भजन भी गाए। 2003 में बॉलीवुड में एंट्री हुई। फिल्म पिंजर में गुलजार का लिखा गाना गाया।
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पूरनचंद ने बताया कि 1992 में जब केंद्र सरकार ने हमें संगीत नाटक अवार्ड से सम्मानित किया तो एक बार यकीं ही नहीं हुआ। उसके बाद सिलसिला आगे बढ़ता चला गया। मध्य प्रदेश सरकार ने 1998 में तुलसी सम्मान से नवाजा था। वडाली ब्रदर्स को 1992 में संगीत नाटक अकादमी का प्रतिष्ठित सम्मान दिया गया था। 2003 में पंजाब संगीत अवार्ड दिया गया। 2005 में पूरनचंद को पदमश्री से सम्मानित किया गया।
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वडाली ब्रदर्स तू माने या न माने, हीर और याद पिया की जैसे सूफी गानों के याद किए जाते हैं। वडाली ब्रदर्स फिल्मों में गाना नहीं चाहते थे, लेकिन बाद में वे राजी हो गए और फिर एक के बाद एक सुपरहिट बॉलीवुड गाने दिए। जैसे- रंगरेज मेरे (तनु वेड्स मनु, 2011), तू ही तू ही (मौसम, 2011), दर्दा मारेया (पिंजर, 2003) और चेहरा मेरे यार का (धूप, 2003) आदि।
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