युवाओं को इस समय एक भयानक बीमारी ने जकड़ लिया है। आपने इस बीमारी के बारे सुना होगा। जानिए क्या है इसके लक्षण और कैसे करें इससे बचाव।
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अर्थराइटिस
इस बीमारी का नाम है अर्थराइटिस। पहली बार सुनने में आपको यह लगेगा कि अर्थराइटिस तो उम्रदराज महिलाओं को होता है। लेकिन अब देश की आधी से ज्यादा आबादी यानि युवा भी इस बिमारी की चपेट में आने लगे हैं। अर्थराइटिस का नाम सुनते ही लगता है ये तो एक आम बीमारी है, लेकिन ऐसा है नहीं। ये आम बीमारी आपको जितनी आम लगती है उतनी ही खतरनाक है।
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आर्थराइटिस की समस्या
पहले एक भ्रम था कि ये बढ़ती उम्र के साथ ही होती है, लेकिन हालिया शोध बताते हैं कि अर्थराइटिस केवल बुजुर्ग या उम्रदराज लोगों को ही नहीं होती बल्कि आज की युवा पीढ़ी इससे सबसे ज्यादा प्रभावित होती है। अब 30 साल की उम्र में ही आर्थराइटिस की समस्या आने लगी है। घुटने के अंदर ग्रीस नर्म होने की वजह से दर्द रहने लगता है और सही इलाज नहीं होने पर घुटना बदलवाने की जरूरत भी पड़ सकती है। दूसरी तरफ दर्द के शुरुआती दौर में ही अगर एक विशेष इंजेक्शन लगवा लिया जाए तो दर्द के साथ-साथ ऑपरेशन से भी निजात मिल सकती है।
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आर्थराइटिस की समस्या
ईवा अस्पताल के ज्वाइंट रिप्लेसमेंट स्पेशलिस्ट डॉ. तनवीर सिंह भुटानी के मुताबिक घुटने पर पुरानी चोट होने, एक्सीडेंट या घुटने की ग्रीस नर्म होने के कारण दर्द रहने लगता है। कुर्सी पर बैठकर एकदम से उठने पर तेज दर्द होता है। इसे प्री-आर्थराइटिस कहा जाता है। अगर यही स्थिति 12 माह तक रह जाए तो घुटने बदलवाने की नौबत भी आ सकती है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि 30 साल की उम्र में ही यह समस्या आने लगती है। डॉ. भुटानी के मुताबिक इस इंजेक्शन की वजह से नर्म हुई ग्रीस फिर से ठीक हो जाती है और घुटने के अंदर ही जरूरी रिपेयर होने के कारण दर्द खत्म हो जाता है। इसके उपयोग के बाद घुटना रिप्लेस कराने की जरूरत भी कम ही पड़ती है।
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आर्थराइटिस की समस्या
बीमारी के लक्ष्ाण: जोड़ों में काफी समय तक दर्द रहना, हड्डियों में खिंचाव रहना। कई बार दर्द ज्यादा होने से बुखार भी आता है। नींद न आना और दवाओं का कुछ खास असर न होना। जोड़ों में लगातार सूजन और अकड़न महसूस होना। उठने-बैठने और रोजमर्रा के काम करने में तकलीफ होना। एलोवेरा का सेवन केवल अर्थराइटिस के दर्द में ही आराम नहीं देता बल्कि अन्य बहुत सी बीमारियों में भी यह फायदेमंद है। एलोवेरा आपके इम्यून सिस्टम और ऊर्जा के स्तर को मजबूत करता है।
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अर्थराइटिस के दर्द
ये हैं बड़े कारण: मोटापा और तनाव अर्थराइटिस के मुख्य कारण हैं। आपके अंदर हॉरमोन की कमी, औरतों में एस्ट्रोजेन की कमी और थाइराइड का विकास भी इसका कारण बन सकता है। खून से जुड़ी बीमारी की वजह से और कई बार जब आपका खून साफ न हो। आपको जोड़ों के दर्द की शिकायत हो सकती है। जब आपको सुबह उठकर अकड़न महसूस हो और हाथ पैर में सूजन दिखे तो जरूर डॉक्टर से सलाह लें। दवाई खाने से दर्द तो एक पल के लिए कम हो जाता है, लेकिन फिर पूरे दिन आपकी एनर्जी कम हो जाती है।डॉक्टर कहते हैं कि इस बीमारी से निजात का उपाय दवा नहीं, बल्कि आपका आत्मविश्वास है।
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स्मोकिंग और ड्रिंकिंग आपको इस बीमारी की ओर धकेल सकती है। शराब, जंक फूड से इस बीमारी का खतरा बढ़ जाता है। जंक फूड और कार्बोहाइड्रेड वाले भोजन कम खाने चाहिए। तेल और मीठी चीजें इनके लिए नुकसान दायक है। मेडिटेशन और योगा आपकी अच्छी नींद के साथ अच्छी सेहत देते हैं। तनाव कम लें और सकारात्मक सोच के साथ जीवन में आगे बढ़ें। अर्थराइटिस के रोग को रोकने के लिए कब्ज से छुटकारा पाना बहुत जरूरी होता है, इसके लिए अर्थराइटिस के रोगी को कुछ दिनों तक गुनगुना एनिमा देना चाहिए ताकि रोगी का पेट साफ हो।
लहसुन, मौसमी, संतरा, गाजर और चुकंदर के रस का पर्याप्त सेवन इस रोग से निजात दिलाने में सहायक है। साथ ही फूलगोभी का रस पीते रहने से जोड़ों के दर्द में लाभ मिलता है। मालिश आपको आराम दे सकती है, लेकिन तेज मालिश नहीं, बल्कि हल्के हाथों की मालिश या स्पा।सुबह वॉक या रनिंग, थोड़ा परिश्रम और शरीर से पसीना निकालने वाले व्यायाम आपको मदद कर सकते हैं। अर्थराइटिस के दर्द के उपचार में अदरक का सेवन बहुत ही फायदेमंद है। रोजाना दो सौ ग्राम अदरक दो बार लेने से दर्द में बहुत राहत मिलती है। हाल ही में हुए चिकित्सीय शोधों में भी यह साफ हो चुका है कि सूप, सोस और सलाद के साथ अदरक का सेवन अर्थराइटिस की समस्या में राहत देता है।