16 साल की उम्र में कैंसर ने इस शख्स के पैर छीन लिए थे, लेकिन हिम्मत नहीं छोड़ी। कुछ कर गुजरने के जज्बे ने उन्हें आज इस मुकाम पर पहुंचा दिया।
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दिव्यांग बॉडी बिल्डर आनंद अर्नोल्ड
ये हैं 12 बार मिस्टर पंजाब, 3 बार मिस्टर इंडिया और 1 बार मिस्टर वर्ल्ड का खिताब जीत चुके आनंद अर्नोल्ड। इन्होंने हाल ही में पानीपत बॉडी बिल्डिंग एसो. एंड फिगर फिट की ओर से 36 वीं मिस्टर नार्थ इंडिया सीनियर, जूनियर, हैंडीकैप बॉडी बिल्डिंग चैंपियनशिप में बॉडी बिल्डरों ने जौहर दिखाए। दिव्यांगों कैटेगरी में पंजाब के आनंद आर्नोल्ड विनर बने।
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दिव्यांग बॉडी बिल्डर आनंद अर्नोल्ड
पंजाब के लुधियाना निवासी इस युवक के सपनों को 13 साल की उम्र में मिस्टर गोल्डन लुधियाना के खिताब ने पंख लगा दिए, लेकिन 16 साल की उम्र में कैंसर की चपेट में आ गए थे। जिसके बाद उनके दोनों पैर खराब हो गए थे और कैंसर ने उन्हें बेड पर लेटे रहने को मजबूर कर दिया। बेड पर तीन साल तक उन्होंने इस उम्मीद से गुजारे कि कुछ करके दिखाना है। इस सोच ने हौसला बंधाया और बॉडी बिल्डिंग शुरू की दी।
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दिव्यांग बॉडी बिल्डर आनंद अर्नोल्ड
आनंद ने बताया कि अर्नोल्ड परिवार में जन्म लेने पर मेरा नाम बड़ी उम्मीद से आनंद अर्नोल्ड रखा गया। कई फेमिली मेंबर खिलाड़ी थे, लिहाजा इविंग क्रिश्चियन स्कूल में पढ़ते हुए मैंने भी बॉडी बिल्डर बन मिस्टर लुधियाना का खिताब जीता। मगर 7वीं में पहुंचा तो मेरी लाइफ में टर्निंग प्वाइंट आया। स्पाइनल कॉर्ड कैंसर होने से कमर से नीचे का हिस्सा पैरालाइज हो गया।
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6 फुट का आदमी मारकर ढाई फीट के सूटकेस में पैक कर दिया
मौत से बचने के लिए ऑपरेशन कराया तो तीन साल बिस्तर पर गुजारने पड़े। एक-एक दिन पहाड़ की तरह गुजरा। आनंद ने बताया कि उस दौरान मेरी मम्मी इंदिरा अर्नोल्ड ने किसी मासूम बच्चे की तरह मुझे पाला। जीने का हौसला जागा और बेरंग हो चुकी जिंदगी पटरी पर लौटी। पढ़ाई तो छूटी मगर 16 साल की उम्र में फिर से वॉकर के सहारे कसरत शुरू की।
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दिव्यांग बॉडी बिल्डर आनंद अर्नोल्ड
आनंद ने बताया कि घर में ही जिम बनाया, रुटीन में एक्सरसाइज करते-करते शहर के एक जिम में जाने लगा। एक्सरसाइज करते पता ही नहीं चला, कब मेरे नाम 40 टाइटल जुड़ गए। इनमें 12 बार मिस्टर पंजाब और तीन बार मिस्टर इंडिया के टाइटल मिले। आर्म-रेसलिंग में भी गोल्ड मेडल मिला। इस बड़ी कामयाबी के पीछे मेरे कोच रवि पराशर का हाथ है।
आनंद आईएमसी और बूम 3 के ब्रांड एंबेसडर भी हैं। हॉलीवुड स्टार व पूर्व प्रोफेशनल बॉडी बिल्डर अर्नोल्ड श्वॉर्जनेगर उनके रोल-मॉडल हैं। इसके अलावा उन्होने साउथ इंडियन फिल्में भी की है। आनंद बताते हैं कि भले ही वह दिव्यांग है, लेकिन किसी से कम नहीं हैं। बावजूद इसके उन्हें सरकार की तरफ से कोई नौकरी नहीं दी गई। उच्च अधिकारियों से कई बार बात की, लेकिन आश्वासन के सिवाय कुछ नहीं मिला।