आखिरकार पंजाब कैबिनेट का विस्तार हो ही गया। नौ विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलाकर सरकार में शामिल कर लिया गया है।
शनिवार को राज्यपाल वीपी सिंह बदनौर ने पंजाब राजभवन में सभी को शपथ दिलाई। कुल 27 मिनट के प्रोग्राम में सभी ने पंजाबी भाषा में शपथ ग्रहण की। कैबिनेट में शामिल होने वाले नौ मंत्रियों के नाम शुक्रवार को सार्वजनिक किए गए। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी और मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के बीच हुई बैठक में इन नामों को मंजूरी दी गई थी। मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार रवीन ठुकराल के अनुसार, मंत्रियों के विभागों का एलान बाद में किया जाएगा।
जिन नौ विधायकों को पंजाब कैबिनेट में जगह मिली है, उनके नाम हैं सुखजिंदर सिंह रंधावा, सुखबिंदर (सुख) सिंह सरकारिया, विजय इंदर सिंगला, भारत भूषण आशू, श्याम सुंदर अरोड़ा, ओपी सोनी, राणा गुरमीत सिंह सोढ़ी, गुरप्रीत सिंह कांगड़ और बलबीर सिंह सिद्धू। इसके साथ ही पंजाब कैबिनेट में मौजूदा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अरुणा चौधरी और रजिया सुलताना को कैबिनेट मंत्री का दर्जा दे दिया गया है।
पंजाब कैबिनेट मीटिंग
राज्य कैबिनेट में नौ मंत्रियों को शामिल किए जाने के साथ ही पंजाब सरकार ने राज्य विधानसभा के 15 फीसदी मंत्रिमंडल का आंकड़ा छू लिया है। अब तक कैबिनेट में एक मंत्री के इस्तीफे के बाद सात मंत्री कार्यरत थे। विवादों के चलते बिजली मंत्री राणा गुरजीत सिंह को पद से इस्तीफा देना पड़ा था। वहीं, मंत्री न बनाए जाने से खफा होकर अब उड़मुड़ से विधायक संगत सिंह गिल्जियां ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है।
राणा गुरमीत के नाम पर जाखड़ को एतराज
पार्टी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, प्रदेशाध्यक्ष सुनील जाखड़ भले ही वीरवार और शुक्रवार को राहुल गांधी के साथ कैप्टन की बातचीत के दौरान मौजूद रहे थे, लेकिन कैबिनेट विस्तार में चुने गए मंत्रियों को लेकर वे भी नाराज हो गए हैं। पता चला है कि दरअसल जाखड़ को राणा गुरमीत सोढी के मंत्री बनने पर आपत्ति थी। वे इस मुद्दे पर पहले भी तभी माने थे जब सुखजिंदर सिंह रंधावा को मंत्री बनाए जाने पर रजामंदी दिखाई गई थी।
दो दिन हुई राहुल और कैप्टन में बैठक
उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह वीरवार को दिल्ली में राहुल गांधी से मिले थे। करीब तीन घंटे तक चली बैठक में कैप्टन के साथ पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष सुनील जाखड़ और पंजाब मामलों की प्रभारी आशा कुमारी भी मौजूद रहीं। इस बैठक में कैप्टन ने मंत्री बनाए जाने वाले विधायकों की सूची राहुल गांधी को सौंपी, जिस पर बैठक में ही विचार-विमर्श हुआ। फिर शुक्रवार दोपहर करीब एक घंटे तक चली बैठक में नए मंत्रियों को तुरंत शपथ दिलाने का फैसला लेते हुए सभी के नामों का एलान कर दिया गया। बैठक में 29 अप्रैल को दिल्ली में होने वाली रैली को लेकर भी चर्चा हुई।