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बड़ी राहतः कैंसर को ठांय-ठांय करने आई 'मैजिक बुलेट'

Thu, 24 Sep 2015 07:54 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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कैंसर के मरीजों के लिए बड़ी राहत। बीमारी से निजात दिलाने के लिए आ गई है 'मैजिक बुलेट', जो कैंसर का खात्मा करेगी। जानिए इसके बारे में विस्तार से।
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बड़ी राहतः कैंसर को ठांय-ठांय करने आई 'मैजिक बुलेट'

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ब्लड कैंसर का नाम सुनते ही लोगों की सांसें थम जाती हैं। लोग समझते हैं कि यदि ब्लड कैंसर हो गया तो मरना तय है, इसका कोई इलाज नहीं है। लेकिन मेडिकल साइंस ने इस धारणा को गलत साबित कर दिया है।
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मार्केट में लेमैटिन्बमीसाइलेट (गेलवेक) की दवा उपलब्ध है। इसे मैजिक बुलेट भी कहते हैं। पीजीआई के इंटरनल मेडिसिन के प्रोफेसर पंकज मल्होत्रा ने बताया कि मैजिक बुलेट कीमोथैरेपी का ही काम करती है।

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यह दवा कैंसर के लिए जिम्मेदार सेल को खत्म करने का करती है। चंडीगढ़ पीजीआई में कुल 3500 ब्लड कैंसर के मरीज रजिस्टर्ड हैं। इनमें से अधिकतर को मैजिक बुलेट दी जा रही है।
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जब तक यह नहीं आई थी, तब तक ब्लड कैंसर से पीड़ित मरीजों की जिंदगी दो से तीन साल की होती थी। मैजिक बुलेट का फायदा तभी होता है, जब ब्लड कैंसर का शुरुआती दौर में पता चल जाए।
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डॉ. मल्होत्रा ने बताया कि आमतौर पर जब किसी को ब्लड कैंसर होता है तो स्थानीय डाक्टर समझ नहीं पाते। वे उनका इलाज करते रहते हैं और इलाज में देरी हो जाती है। स्थानीय डाक्टरों व मरीजों को भी आज भी मैजिक बुलेट के बारे में पता नहीं है।
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डॉ. मल्होत्रा कहते हैं कि पीजीआई में हरियाणा, पंजाब, हिमाचल, यूपी व बिहार से ब्लड कैंसर के मरीज आते हैं। हर महीने 25-30 नए ब्लड कैंसर के पेशेंट आते हैं। इनमें से 80 प्रतिशत मरीजों को भी नहीं पता कि दवा से ब्लड कैंसर ठीक हो सकता है।

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साल 2001 से पहले यह दवा काफी महंगी थी। एक महीने का डोज करीब एक लाख 20 हजार रुपये का पड़ता था, लेकिन अब इसका जेनरिक वर्जन आ गया है। अब एक महीने का डोज ढाई से तीन हजार रुपये का है। यह दवा जिंदगी भर लेनी पड़ती है। हालांकि कई मरीजों की दवा बंद भी हो जाती है।
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बता दें कि आम तौर पर ब्लड कैंसर 30 से 40 वर्ष की उम्र वालों को होता है, लेकिन कुछ बच्चों में यह भी बीमारी देखी जा रही है। इसके मुख्य रूप से लक्षण भूख न लगना, तिल्ली का बढ़ना, पेट भारी होना होता है।
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