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भारत-पाक सरहद पर होने जा रहा ऐसा बदलाव, पीएम मोदी खुश होंगे...इमरान खान भी कहेंगे वाह

Fri, 03 Aug 2018 09:45 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अमृतसर(पंजाब)
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वाघा बॉर्डर
भारत और पाकिस्तान की सरहद पर एक ऐसा बदलाव होने जा रहा है, जिसे देखकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुश होंगे, वहीं पाक के होने वाले पीएम इमरान खान भी वाहवाही करेंगे।
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WAGAH BORDER - फोटो : SELF
दरअसल, पंजाब में अटारी बॉर्डर पर लगे दोनों देशों के गेट बदले जा रहे हैं। छठी बार यह बदलाव हो रहा है। यह फैसला इसलिए लिया गया, ताकि दोनों तरफ के लोग, दोनों देशों की रिट्रीट सेरेमनी देख सकें। इस संबंध में बीएसएफ तथा पाक रेंजर्स के डायरेक्टर जनरल की दिल्ली में हुई बैठक में फैसला लिया गया था। अगस्त के आखिर तक इन्हें स्थापित किया जाएगा।
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अटारी-वाघा बॉर्डर
बीएसएफ अमृतसर सेक्टर के डीआईजी जेएस ओबराय ने बताया कि भारतीय गेट का और पाकिस्तानी गेट का डिजाइन अलग-अलग है। दोनों गेटों को स्लाइडिंग स्टाइल में लगाया जाएगा। पिलरों की गोलाई कम होगी, पर दोनों का डिजाइन एक जैसा होगा। गेटों के पास ही दोनों देशों के झंडे लगाए जाएंगे। इनके लगने से लोग रिट्रीट सेरेमनी आसानी से देख सकेंगे।

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अमृतसर में वाघा बॉर्डर
डीआईजी ने बताया कि अब तक लगे गेट आड़े तिरछे से, जिस वजह से पाकिस्तान के लोग भारत की रिट्रीट सेरेमनी नहीं देख पाते थे और भारतीय उनकी। इसे ध्यान में रखते हुए यह बदलाव करने का फैसला लिया गया। अब से पहले पांच बार दोनों देशों के गेटों को बदला जा चुका है।
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अमृतसर में वाघा बॉर्डर
11 अक्टूबर, 1947 को गेट ड्रम से बना था। उस समय भारतीय ब्रिगेडियर रहे महिंदर सिंह चोपड़ा के बेटे पुष्पिंदर सिंह चोपड़ा बताते हैं कि लाइन की पहचान के लिए उनके पिता के कहने पर दोनों तरफ एक-एक ड्रम लगाया गया और चूने की लकीर बना कर उनको गेट के पिलर की शक्ल में खड़ा कर दिया गया। यह अटारी बॉर्डर पर पहला गेट था।
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रिट्रीट सेरेमनी के तेवर बदले
1958 में बॉर्डर पर पुलिस चौकी बनाई गई। उसके बाद गेट से आने-जाने वाले लोगों की चेकिंग होने लगी। उनका रिकॉर्ड रखा जाने लगा। 1965 में जब बीएसएफ का गठन हुआ तो इस बॉर्डर की जिम्मेदारी बीएसएफ को सौंप दी गई। बीएसएफ ने फिर बॉर्डर पर बांस के बेरीकेड्स लगा दिए। तभी से रिट्रीट सेरेमनी का सिलसिला भी शुरू हुआ था।
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Wagah border retreat ceremony
1971 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान बॉर्डर पर लोहे का गेट लगा दिया गया, लेकिन इसकी चौड़ाई ज्यादा नहीं थी। 1990 में जब पंजाब में माहौल खराब था और पाकिस्तान की तरफ से आतंकी गतिविधियां बढ़ गई तो गेट को और मजबूत कर दिया गया। साथ ही चौकसी भी बढ़ा दी गई थी।

 
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Wagah border retreat ceremony
1998 में गेट के किनारों समेत पूरे बॉर्डर पर फेंसिंग कर दी गई थी। 2001 में रिट्रीट गैलरी बनाई गई और गेट का विस्तार कर दिया गया। साथ ही इस गेट से व्यापार का सिलसिला भी शुरू हुआ। आज इसी गेट से आयात-निर्यात होता है। बता दें कि इन्हीं गेटों के पास आज हर शाम को बीटिंग द रिट्रीट सेरेमनी होती है, जिसे देखने के लिए हजारों लोग जुटते हैं।
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