झाड़ियों में मिली नवजात आखिरकार दुनिया से विदा हो गई। जन्म के कुछ घंटे बाद ही नवजात को झाड़ियों में फेंक दिया गया था। जब वह मिली उसके आसपास चूहे घूम रहे थे।
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झाड़ियों में मिली नवजात
मामला हरियाणा के पंचकूला का है। मां को ईश्वर का दूसरा रूप कहा जाता है। वही बच्चे के सबसे करीब होती है। औलाद से बढ़कर उसके लिए कुछ नहीं होता है, लेकिन एक मां ऐसी भी है, जो अपने कलेजे के टुकड़े को फेंकने से जरा भी नहीं हिचकिचाई। कुछ घंटे पहले ही दुनिया में आई थी कि उसे अखबार में लपेट कर झाड़ियों में फेंक दिया। जब तक वह लोगों को मिली, उसकी हालत खराब हो चुकी थी।
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झाड़ियों में मिली नवजात
इलाज के लिए हॉस्पिटल ले जाया गया, तो डॉक्टर ने 24 घंटे का वक्त दिया। लेकिन बच्ची 24 घंटे न जी सकी और रविवार को मल्टी ऑर्गन फेल होने से उसकी मौत हो गई। जन्म के तुरंत बाद अगर बच्ची को मां का आंचल और उसका दूध मिला होता तो वह दम न तोड़ती। बच्ची का इलाज पीजीआई के चंडीगढ़ पीजीआई के एडवांस
पिडियाट्रिक्स सेंटर में चल रहा था।
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झाड़ियों में मिली नवजात
डॉक्टर बताते हैं कि बच्ची को जब पीजीआई में दाखिल किया तो उसका पूरा शरीर नीला और ठंडा पड़ गया था पड़। बीपी बिल्कुल लो था। सांस लेने में उसे दिक्कत आ रही थी। हमें अंदाजा हो गया था कि बच्ची के लिए अगले 24 घंटे मुश्किल भरे हैं। अगर 24 घंटे जिंदा रही, तभी उसके बचने की उम्मीद है। लेकिन ऐसा हो न सका। बच्ची ऑक्सीजन को मेंटेन नहीं कर पा रही थी।
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झाड़ियों में मिली नवजात
बता दें कि शनिवार सुबह पंचकूला के सेक्टर-8 में खाली प्लॉट में महिला को नवजात बच्ची पड़ी मिली। कोठियों में काम करने वाली महिला ने पार्क के पास झाड़ियों में अखबार में लिपटी कोई चीज हिलती दिखाई दी। आस पास चूहे भी घूम रहे थे। महिला को शक हुआ और उसने चूहे भगाए। अखबार हिलाकर देखा तो बच्ची के रोने की आवाज आने लगी। महिला ने लोग इकट्ठे किए और पुलिस को सूचना दी।
मौके पर सेक्टर-7 पुलिस चौकी से पुलिस मुलाजिम भी पहुंचे और बच्ची को तुरंत जनरल अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने बच्ची का चेकअप किया तो हालत नाजुक थी। जांच में पता चला कि बच्ची का जन्म 12 घंटे पहले ही हुआ था। करीब पांच घंटे तक जनरल अस्पताल में बच्ची का इलाज कर उसे चंडीगढ़ पीजीआई रेफर किया गया, तब तक बच्ची की हालत पहले से कुछ बेहतर थी, लेकिन फिर बिगड़ गई।