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पुण्यतिथि विशेषः ताजमहल के बाद दूसरा पसंदीदा पर्यटक स्थल है नेकचंद का रॉक गार्डन

Fri, 12 Jun 2020 03:20 PM IST
खुशबू गोयल अभिषेक वाजपेयी, चंडीगढ़
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नेकचंद, रॉक गार्डन - फोटो : अमर उजाला
आपको यह जानकर थोड़ी हैरानी जरूर होगी लेकिन एक सर्वे में यह बात सामने आई है कि विश्व प्रसिद्ध ताजमहल के दीदार के बाद देश-विदेश के पर्यटकों की दूसरी पसंद चंडीगढ़ का रॉक गार्डन है। प्रकृति आधारित लेखों के लिए प्रसिद्ध अमेरिका की ऑनलाइन मैगजीन स्मिथ सोनिअन के सर्वे में यह बात सामने आई है। मैगजीन के सर्वे के मुताबिक, रॉक गार्डन को देखने के लिए हर रोज 5000 से अधिक लोग पहुंचते हैं।
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नेक चंद - फोटो : self
बता दें कि लोक निर्माण विभाग में रोड इंस्पेक्टर नेक चंद सैनी ने वर्ष 1958 में रॉक गार्डन को बनाने का कार्य शुरू किया था। वेस्ट मैटेरियल से बने इस गार्डन को देश के विभिन्न हिस्सों के अलावा विदेशों से भी हजारों लोग पहुंचते हैं। यहां आने वाले टूरिस्टों में 35 प्रतिशत विदेशी टूरिस्ट शामिल हैं। अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन, हॉलैंड, रूस के साथ कई अन्य देशों के पर्यटक चंडीगढ़ यात्रा के दौरान रॉक गार्डन को देखने में विशेष रुचि दिखाते हैं।

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'रॉक लेजेंड' नेकचंद
टूरिस्टों की पसंद जानने के लिए अमेरिका की प्रसिद्ध ऑनलाइन मैगजीन स्मिथ सोनिअन ने वर्ष 2016 में सर्वे एक कराया था। इसमें दावा किया गया था कि आगरा के विश्व प्रसिद्ध ताजमहल के बाद टूरिस्ट चंडीगढ़ में पद्मश्री नेकचंद की कलाकृति रॉक गार्डन देखने के लिए आते हैं। सर्वे के दौरान यह बात भी सामने आई कि 5000 से अधिक टूरिस्ट प्रतिदिन रॉक गार्डन देखने के लिए आते हैं।

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'रॉक लेजेंड' नेकचंद
मेरे कार्यकाल के दौरान मैगजीन ने यह सर्वे किया गया था। उस समय लगभग 10 दिनों तक मैगजीन के सर्वे करने वाले कर्मचारियों के संपर्क में रहा था। 10 दिनों के आकलन करने के बाद ही यह बात सामने आई थी कि गार्डन को देखने के लिए प्रतिदिन 5000 देशी-विदेशी पर्यटक आते हैं।  
- हर्ष कुमार, पूर्व एससी, रॉक गार्डन, चंडीगढ़
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'रॉक लेजेंड' नेकचंद
बेल्जियम से आए थे लॉफिंग मिरर   
रॉक गार्डन के देश में भी नहीं विदेशों में भी बहुत ही मुरीद हैं। नेक चंद सैनी के इस प्राकृतिक निर्माण से प्रभावित होकर इंग्लैंड के कुछ प्रकृति प्रेमियों के द्वारा नेक चंद फाउंडेशन बनाया गया, जिसके द्वारा गार्डन में लोगों को हंसाने के लिए बेल्जियम से लाफिंग मिरर भेजे गए। जब नेक चंद सैनी चलने फिरने में असमर्थ हो गए तो फाउंडेशन की ओर से उनके लिए गोल्फ कार्ट भी भेजी गई, जो देखरेख के अभाव में गार्डन में जीर्ण-शीर्ण अवस्था में पहुंच चुकी है।

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