पंजाब के कैबिनेट मंत्री नवजोत सिद्धू की तीस साल पुराने मामले में मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। सुप्रीम कोर्ट दोबारा सुनवाई को तैयार हो गया है।आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला...
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नवजोत सिंह सिद्धू
- फोटो : फाइल फोटो
पटियाला में 27 दिसंबर 1988 की दोपहर सिद्धू और गुरनाम सिंह (65) के बीच रोड रेज में मामूली विवाद हुआ था। गुरनाम के परिजनों का आरोप है कि सिद्धू ने गुरनाम के सिर पर बाईं ओर मुक्का मारा।
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नवजोत सिद्धू
- फोटो : फाइल फोटो
इससे ब्रेन हैमरेज हो गया और गुरनाम की मौत हो गई। उनके वकीलों में सुप्रीम कोर्ट में भी यही दलील दी थी कि गुरनाम सिंह की मौत सिद्धू द्वारा दी गई सिर की चोट से हुई है। इसलिए यह साफ तौर पर कत्ल का केस है, क्योंकि यह चोट गलती से नहीं पहुंचाई जा सकती।
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नवजोत सिंह सिद्धू
- फोटो : ANI (फाइल फोटो)
ट्रायल कोर्ट ने किया था बरी, हाईकोर्ट ने बदल दिया था फैसला
इस मामले में पटियाला के ट्रायल कोर्ट ने सिद्धू को बरी कर दिया था। इसके बाद गुरनाम सिंह के परिजनों ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में शरण ली। हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को बदल दिया। हाईकोर्ट ने कहा था कि गुरनाम सिंह की मौत कार्डियक फेल्योर (ह्दय घात) से नहीं, बल्कि सिर पर चोट लगने की वजह से हुई थी।
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नवजोत सिद्धू
- फोटो : फाइल फोटो
इस मामले में गठित डॉक्टरों के बोर्ड ने मौत का कारण सिर में चोट और कार्डियक कंडीशंस बताया था। हाईकोर्ट ने सिद्धू और उनके साथी रूपिंदर संधू को दोषी करार दिया था। हालांकि हाईकोर्ट ने कहा था कि यह सोचा-समझा कत्ल नहीं, बल्कि मौके पर आवेग का नतीजा था।
एक चैनल शो में मारने की बात स्वीकारी
बाद में सुप्रीम कोर्ट ने सिद्धू की सजा पर रोक लगाते हुए उन्हें चुनाव लड़ने की इजाजत दी थी। फिर इस मामले में एक और मोड़ आया जब गुरनाम सिंह के परिजनों ने 2010 में एक चैनल के शो में सिद्धू द्वारा गुरनाम को मारने की बात स्वीकार करने की सीडी सुप्रीम कोर्ट में दाखिल कर दी। पर शीर्ष अदालत ने आखिर में इस केस में अपने फैसले में सिद्धू को एक हजार रुपये का जुर्माना लगा कर छोड़ दिया था।