सिद्धू ने कहा कि केंद्र सरकार इन विधेयकों के माध्यम से किसानों की आवाज दबाकर लोकतंत्र की हत्या करना चाहती है। इससे से पूर्व पुराने व नए शहर को जोड़ने वाले भंडारी पुल से लेकर हॉल गेट के 500 मीटर के रास्ते तक सिद्धू समर्थकों ने जाम कर नारेबाजी की। सिद्धू के इस धरना-प्रदर्शन में सीमावर्ती गांवों के किसान भी शामिल हुए। अमृतसर फ्रूट-वेजिटेबल एसोसिएशन व अन्य आढ़ती संस्थाओं ने भी सिद्धू के धरने को अपना समर्थन दिया।
सिद्धू के कार्यक्रम में कांग्रेस पार्टी का कोई रंग नहीं दिखाई दिया
धरना प्रदर्शन स्थल से सभी राजनीतिक पार्टियों को एकजुट होने का संदेश दे रहे नवजोत सिद्धू ने अपने इस कार्यक्रम में कांग्रेस पार्टी के झंडे व डंडे को दूर रखा। सिद्धू के किसी भी समर्थक के हाथ में कांग्रेस पार्टी का झंडा नहीं था। यहां तक की कांग्रेस पार्टी की टिकट पर पार्षद का चुनाव जीतने वाले पार्षदों के हाथों में भी काले झंडे थे।
प्रदर्शन स्थल के रास्ते में सिद्धू की कई होर्डिंग लगाई गई थी। जिसमें उनके यू-ट्यूब चैनल के लोगो की फोटो लगी थी। सिद्धू द्वारा किसानों के समर्थन में किये गए इस कार्यक्रम में शहर का कोई भी विधायक व पदाधिकारी शामिल नहीं हुआ। सिद्धू का यह कार्यक्रम ‘जित्तेगा पंजाब’ के अंतर्गत किया गया।
सिद्धू समर्थकों ने कोरोना वायरस के बचाव के नियम तोड़े
सिद्धू समर्थकों ने इस कार्यक्रम के दौरान कोरोना वायरस के बचाव के लिए निर्धारित नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाईं। उपस्थित लोगों ने तो दो गज की दूरी भी नहीं बनाई। जिस ट्रैक्टर पर बैठकर सिद्धू भंडारी पुल से हाल गेट तक गए, उसके ड्राइवर ने मास्क तक नहीं पहना था। प्रदर्शन में शामिल कई समर्थक बिना मास्क थे। जोड़ा फाटक की घटना के आरोपी पार्षद मिट्ठू मदान भी प्रदर्शन में शामिल हुए।
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