केंद्र सरकार द्वारा महिलाओं की सुरक्षा के लिए जारी किए गए निर्भया फंड का यूटी प्रशासन अबतक आधा भी इस्तेमाल नहीं कर पाया है। लोकसभा में केंद्र सरकार की तरफ से लिखित में दिए गए आंकड़ों के अनुसार चंडीगढ़ को इस फंड के तहत 10.78 करोड़ रुपये जारी हुए हैं लेकिन प्रशासन अबतक इस फंड का करीब 30 प्रतिशत ही खर्च कर पाया है।
लोकसभा में एक सवाल के जवाब में भारत सरकार द्वारा पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार चंडीगढ़ को महिलाओं की सुरक्षा पर काम करने के लिए 10.78 करोड़ रुपये दिए गए। इसमें से चंडीगढ़ प्रशासन अब तक 3.61 करोड़ रुपये ही खर्च कर पाया है। हालांकि 3.61 करोड़ रुपये कहां-कहां खर्च किए गए हैं, इसकी जानकारी नहीं दी गई।
उधर, पंजाब को निर्भया फंड में 49.22 करोड़ रुपये मिले, जिसमें से 21.26 करोड़ ही खर्च हुए हैं। हरियाणा को निर्भया फंड में 40 करोड़ रुपये मिले। हरियाणा भी इस फंड का 10.77 करोड़ रुपये ही खर्च कर पाया है। वहीं, यूटी प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि प्रशासन ने जरूरत के अनुसार महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स पर काफी खर्च किया है।
यहां पर खर्च हुआ निर्भया फंड
अधिकारियों ने बताया कि इमरजेंसी रिस्पांस सपोर्ट सिस्टम (ईआरएसएस) के लिए सेंटर फॉर डेवलमेंट ऑफ एडवांस कंप्यूटिंग (सीडेक) पर निर्भया फंड से खर्च किया है। इसके अलावा चंडीगढ़ प्रशासन और पुलिस ने महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े कई काम किए हैं। इसमें रात में पिक एंड ड्रॉप की सुविधा समेत कई अन्य महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं।
दिसंबर 2019 में भी फंड के इस्तेमाल को लेकर उठे थे सवाल
दिसंबर 2019 में भी निर्भया फंड के कम इस्तेमाल को लेकर प्रशासन पर सवाल उठे थे। दिसंबर तक केंद्र सरकार की तरफ से चंडीगढ़ को इस फंड के तहत 7.46 करोड़ रुपये जारी हुए थे, लेकिन खर्च सिर्फ 2.60 करोड़ रुपये ही किए गए थे। वकील अजय जग्गा ने निर्भया फंड के इस्तेमाल नहीं होने को लेकर चंडीगढ़ के प्रशासक वीपी सिंह बदनौर और उनके सलाहकार मनोज परिदा से शिकायत की थी।
उन्होंने कहा था कि बदनौर यूटी के अधिकारियों से जवाब मांगे कि क्यों निर्भया फंड का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा। हालांकि दिसंबर में चंडीगढ़ के प्रशासक के सलाहकार मनोज परिदा ने कहा था केंद्र सरकार के आंकड़े अधूरे हैं। प्रशासन ने साढ़े 4 करोड़ रुपये से ज्यादा निर्भया फंड में से इस्तेमाल किया है।
यह है निर्भया फंड
दिल्ली के निर्भया सामूहिक दुष्कर्म केस के बाद महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों को रोकने और उनकी सुरक्षा के लिए कदम उठाने के लिए निर्भया फंड बनाया गया था। इस फंड के तहत महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अलावा अन्य मंत्रालय भी कई योजनाएं चलाते हैं, जिन प्रमुख योजनाओं के तहत धन आवंटित किया गया है, उनमें इमरजेंसी रिस्पांस सपोर्ट सिस्टम, सेंट्रल विक्टिम कंपेंसेशन फंड, महिलाओं और बच्चों के खिलाफ साइबर अपराध रोकथाम, वन स्टॉप स्कीम, महिला पुलिस वालंटियर और महिला हेल्पलाइन योजना है।