बेटियां सृष्टि का आधार हैं, इनसे ही जीवन चक्र चलता है। नेशनल गर्ल चाइल्ड डे के मौके पर बेटियां ऐसे अंदाज में नजर आईं, देखकर मां-बाप भी भावुक हो गए, देखिए तस्वीरें।
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राष्ट्रीय बालिका दिवस
गुलाबी पगड़ी से चंडीगढ़ में तीन हजार बेटियों की ताजपोशी हुई। पिंक टर्बन कैंपेन के तहत बेटियों को यह ताज पहनाया गया। इसे पहनने के बाद सभी की मुस्कराहट देखने लायक थी। सम्मान की यह पगड़ी गवर्नमेंट गर्ल्स मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल सेक्टर-18 और सेंट स्टीफंस स्कूल सेक्टर-45 के पीस क्लब की तीन हजार गर्ल स्टूडेंट को पहनाई गई। लड़कों ने भी लड़कियों के सम्मान में गुलाबी स्टॉल्स पहनकर उनका साथ दिया।
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कार्यक्रम एनजीओ युवसत्ता के सहयोग से आयोजित किया गया। जीजीएमएसएसएस सेक्टर-18 की मार्निंग असेंबली के दौरान हुए कार्यक्रम में पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट की जज जस्टिस दया चौधरी मुख्य अतिथि थीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता शिक्षा विभाग की मिशन कोआर्डिनेटर अल्का मेहता ने की।
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वहीं, सेक्टर-45 स्थित सेंट स्टीफंस स्कूल की मार्निंग असेंबली में मुख्य मेहमान जम्मू एंड कश्मीर हाईकोर्ट के जज जस्टिस राजेश बिंदल और सीसीपीसीआर की चेयरपर्सन हरजिंदर कौर रहीं। इस मौके पर जस्टिस दया चौधरी ने कहा कि इसी तरह सभी टीचर्स और पैरेंट्स को बेटियों को जीवन में उच्च लक्ष्य के लिए प्रेरित करना चाहिए।
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जस्टिस राजेश बिंदल ने बताया कि भारत ने इसकी शुरुआत 2008 में की और इसके चार साल बाद यूनाइटेड नेशंस ने 11 अक्तूबर, 2012 को इंटरनेशनल डे ऑफ द गर्ल मनाने का फैसला लिया। उन्होंने इस बात पर भी बल दिया कि लड़कियों और महिलाओं को सशक्त बनाने की कुंजी शिक्षा है और हर स्तर पर इसके लिए प्रयास किए जाने चाहिए।
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हरजिंदर कौर ने कहा कि सभी धर्मों में पगड़ी सम्मान और आदर का प्रतीक होती है और इसे बांधना एक प्रथा है। ‘राइजिंग गर्ल्स’ का संदेश देने के लिए बहुत ही सुंदर तरीके से गुलाबी रंग और गुलाबी पगड़ी का इस्तेमाल किया है। गवर्नमेंट गर्ल्स मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल, सेक्टर-18 की प्रिंसिपल राज बाला और सेंट स्टीफंस स्कूल के प्रिंसिपल लुइस लोपेज ने अपने-अपने स्टूडेंट्स को लड़कियों और महिलाओं के अधिकारों और सम्मान को बनाए रखने की शपथ दिलाई।
2015 में हुई थी गुलाबी पगड़ी की शुरुआत
चंडीगढ़ की लड़कियों ने देश में सबसे पहले गुलाबी पगड़ी को पहना है। समान अधिकार के लिए पगड़ी की शुरुआत 2015 में युवसत्ता एनजीओ की ओर से की गई। एनजीओ के संयोजक प्रमोद शर्मा ने बताया कि देश में पगड़ी को सिर्फ पुरुष ही सम्मान और जिम्मेदारी के तौर पर पहनते हैं। ऐसे में लड़कियों को पगड़ी पहनाने का मकसद वे स्वयं की सुरक्षा और समान अधिकार की जिम्मेदारी खुद उठाएं। इसके लिए वे पुरुषों पर निर्भर न रहें।