टैगोर थिएटर में शनिवार को मंचित ‘म्यूजियम ऑफ स्पीशीस इन डेंजर’ के माध्यम से कुछ नए सवाल समाज के सामने खड़े किए गए।
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एसिड पीड़िताओं का दर्द बयां करता अभिनय, तस्वीरों में
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रामायण युग से लेकर 21वीं सदी तक सिर्फ नाम बदले हैं, नारी की व्यथा कथा एक जैसी है। समाज एक ऐसा अजायबघर है, जिसमें स्त्री नामक प्रजाति ही सबसे ज्यादा खतरे में है।
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एसिड पीड़िताओं का दर्द बयां करता अभिनय, तस्वीरों में
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सीता, द्रोपदी, चित्रांगदा, भंवरी देवी बने किरदार बारी-बारी मंच पर आए और पूंछते रहे कि महिला को उसके हिस्से का सम्मान कब मिलेगा।
एसिड पीड़िताओं का दर्द बयां करता अभिनय, तस्वीरों में
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मुंबई की राशिका अगाशे द्वारा निर्देशित इस नाटक में महिला पात्रों का अभिनय और तल्ख डायलॉग मुख्य आकर्षण रहे। पूरा नाटक पांच महिला पात्रों पर केंद्रित था।
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एसिड पीड़िताओं का दर्द बयां करता अभिनय, तस्वीरों में
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नाटक में न तो कोई बंधा सेट था और न ही कोई कहानी। इसके बावजूद डायलॉग और दमदार अभिनय ने दर्शकों को बांधे रखा।
एसिड पीड़िताओं का दर्द बयां करता अभिनय, तस्वीरों में
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लाइट्स को लेकर प्रयोग भी कमाल के थे। लड़की के जिंदा जलने के दृश्य और पांचों लड़कियों के फ्रंट स्टेज बैठने के दृश्य लाइट इफेक्ट्स की वजह से ही जीवंत हो उठे।