तिरंगे में लिपटकर आए शहीद बख्तावर सिंह को अंतिम विदाई दी गई। बेटे तो सेल्यूट करके शहीद पिता को नमन किया, वहीं पत्नी का रो रोकर बुरा हाल था।
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शहीद बख्तावर को दी गई अंतिम विदाई
शनिवार सुबह नायक बख्तावर सिंह का पार्थिव शरीर गांव हाजीपुर स्थित उनके घर लाया गया तो कोहराम मच गया। पूरा गांव उनके दर्शन को उमड़ा, वहीं दोपहर में राजकीय सम्मान के साथ राजकीय सम्मान के साथ गांव में ही उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। इस दौरान दोनों बच्चों ने शहीद पिता को सेल्यूट किया तो लोग भारतमाता का जयघोष लगाने लगे।
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शहीद बख्तावर को दी गई अंतिम विदाई
पंजाब के होशियारपुर के हाजीपुर गांव का 35 वर्षीय बख्तावर सिंह शुक्रवार सुबह एलओसी पर पाकिस्तान की फायरिंग में घायल हो गया था। उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां रास्ते में ही उसने दमा तोड़ दिया। शुक्रवार सुबह ही शहादत की खबर उनके परिवार को दे दी गई थी, जिसके बाद घर में कोहराम मच गया था। पूरे गांव में मातम का माहौल छा गया था।
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शहीद बख्तावर को दी गई अंतिम विदाई
वहीं शहादत पर बख्तावर सिंह की पत्नी का कहना है कि उन्हें पति की कुर्बानी पर गर्व है। वे देश पर कुर्बान हुए और वे उनकी बहादुरी को सलाम करती हैं। सिर गर्व से ऊंचा कर जसवीर कौर ने सरकार से अपने लिए एक नौकरी की मांग की। उनकी मांग है कि केंद्र सरकार जम्मू कश्मीर क्षेत्र में अमन की बहाली के लिए या तो कोई स्थायी हल करे या पाकिस्तान की ओर से की जा रही नापाक हरकतों का मुंहतोड़ जवाब दें।
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शहीद बख्तावर को दी गई अंतिम विदाई
शहीद के पिता प्रीतम सिंह को अपने बेटे की शहादत पर गर्व है। उन्होंने कहा कि वे बख्तावर के बच्चों को भी देश सेवा के लिए भेजेंगे, ताकि पिता के सपने को पूरा कर सकें। प्रीतम सिंह ने कहा कि अब मोदी सरकार को आरपार की लड़ाई करनी चाहिए। शहीद के जीजा पूर्व सैनिक गुरनाम सिंह ने कहा कि अब बहुत हो चुका। सरकार आरपार की लड़ाई लडे़ नहीं तो हम लोगों को ही बॉर्डर पर भेजें।
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शहीद बख्तावर को दी गई अंतिम विदाई
शहीद के पिता प्रीतम सिंह ने बताया कि उनके तीन बेटे हैं। दो बेटे फौज में हैं और एक अन्य काम करता है। बख्तावर उनका सबसे छोटा बेटा था। वह प्राइमरी और 12वीं की शिक्षा हाजीपुर के सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल से प्राप्त करने के बाद वर्ष 2003 में सेना में भर्ती हुआ था। इस समय वह आठ-सिखलाई रेजीमेंट में राजौरी नौशेरा सेक्टर में हवलदार के पद पर तैनात था।
प्रीतम सिंह ने बताया कि बख्तावर की यूनिट असम से श्रीनगर दो माह पहले ही पहुंची थी। एक माह के लिए बख्तावर की ड्यूटी बेंगलुरू लगी थी। जब बख्तावर बेंगलुरू से ड्यूटी खत्म करके श्रीनगर जा रहा था तो मई माह में कुछ दिन की छुट्टी बिताने के लिए घर आया था। 12 साल पहले ही बख्तावर की शादी हुई थी। वे अपने पीछे पत्नी और 3 बच्चे छोड़ गए हैं। 11 साल का बेटा, 9 साल की बेटी और सिर्फ नौ माह का बेटा।