नेत्रदान महादान है, लेकिन क्या आप भी इसके बारे में पूरी जानकारी रखते हैं। शायद नहीं, तो यहां पढ़ें 10 सवाल और उनके जवाब, सबकुछ जान जाएंगे।
विज्ञापन
2 of 9
eye
करीब 800 लोग रोशनी के इंतजार में हैं। उनकी आंखें इस खूबसूरत दुनिया को देख नहीं सकतीं। इनकी आंखों के सामने कई साल से अंधेरा छाया है। इनमें बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक शामिल हैं। इनकी रोशनी सिर्फ इसी शर्त पर वापस आ सकती है, जब कोई नेत्रदान करे। भारत में नेत्रदान की दर बहुत कम है।
विज्ञापन
3 of 9
eye
एक अनुमान के मुताबिक 30 लाख लोगों को आंखें चाहिए, जबकि एक साल में सिर्फ 45 हजार कॉर्निया ट्रांसप्लांट हो पाता है। पीजीआई में करीब 500 और मेडिकल कॉलेज में 300 मरीजों को कॉर्निया की जरूरत है। स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से 25 अगस्त से 8 सितंबर तक राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़ा मनाया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य नेत्रदान के महत्व के बारे में व्यापक पैमाने पर जन जागरूकता पैदा करना है।
4 of 9
eye
इस वजह से जाती है रोशनी और यह है इलाज
आंखों की रोशनी जाने की मुख्य वजह कॉर्निया की बीमारियां (कॉर्निया की क्षति, जो आंखों की अगली परत है), ग्लूकोमा, कैंसर व अन्य कई कारण हैं। इसका एकमात्र इलाज नेत्रदान है। किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद नेत्रदान से कार्निया प्रत्यारोपण की मदद से व्यक्ति फिर से देख सकता है।
विज्ञापन
5 of 9
eye
पीजीआई में पांच साल में कितनी आई डोनेशन
साल आई डोनेशन कॉर्निया ट्रांसप्लांट
2013 306 251
2014 318 273
2015 546 393
2016 660 436
2017 778 470
2018 (अगस्त) 554 314
विज्ञापन
6 of 9
आई
- फोटो : Demo Pic
सवाल : नेत्रदान कौन कर सकता है? जवाब : कोई भी व्यक्ति, चश्मे लगाने वाला व्यक्ति व जिसकी आंखों की सर्जरी हुई हो, वो भी नेत्रदान कर सकते हैं।
सवाल : मैं डायबिटीज से पीड़ित हूं, क्या मैं नेत्रदान कर सकता हूं। जवाब : डायबिटीज, हाइपरटेंशन, अस्थमा व मोतियाबिंद से पीड़ित रोगी भी आंखें दान कर सकते हैं।
सवाल: किन परिस्थितियों में व्यक्ति नेत्रदान नहीं कर सकता। जवाब : एड्स, हैपेटाइटिस बी या सी, रैबीज, टेटनस और मलेरिया जैसी संक्रमण बीमारियों में पीड़ित व्यक्ति नेत्रदान नहीं कर सकते।
विज्ञापन
7 of 9
सवाल: मृत्यु के कितनी देर बाद कॉर्निया निकाला जाना चाहिए। जवाब : आदर्श स्थिति मौत के एक घंटे के भीतर, लेकिन मृत्यु के छह से आठ घंटे की अवधि तक कॉर्निया को निकाल लिया जाना चाहिए।
सवाल : क्या नेत्रदान से व्यक्ति का चेहरा खराब हो जाता है? जवाब : नेत्रदान करने से व्यक्ति का चेहरा खराब नहीं होता। यह केवल एक मिथक है। जब कोर्निया निकाली जाती है तो उसके स्थान पर ट्रांसपेरेंट आई कैप लगा दी जाती है।
सवाल: मुझे अपनी आंखें क्यों दान करनी चाहिए? जवाब : नेत्रदान एक नेक काम है। इससे आप दो लोगों की जिंदगी में उजाला ला सकते हैं।
8 of 9
अांखें
सवाल : मैं अपनी आंखें कब दान कर सकता हूं। जवाब : नेत्रदान की शपथ किसी भी उम्र में ली जा सकती है, लेकिन नेत्रदान केवल मृत्यु के बाद ही किया जा सकता है।
सवाल : किसी की मृत्यु पर तुरंत क्या कदम उठाने चाहिए। जवाब : नेत्रदाता की पलकें बंद करें। पंखा व एसी बंद करें। नेत्रदाता का सिर तकिए के नीचे रखकर थोड़ा ऊपर उठाएं। जल्द से जल्द आईबैंक के नंबर पर कॉल करें।
सवाल : क्या नेत्रदाता को अस्पताल ले जाने की आवश्यकता होती है? जवाब : नहीं, आपको केवल नेत्र बैंक की टीम से संपर्क करने की जरूरत है। आईबैंक की टीम तुरंत पहुंचेगी और कॉर्निया निकाल लेगी।
सवाल : चंडीगढ़ में नेत्रदान कैसे कर सकते हैं। जवाब : पीजीआई और सेक्टर-32 मेडिकल कालेज में आई बैंक हैं। पीजीआई के आई बैंक के हेल्पलाइन नंबर 7087008200 पर काल कर सकते हैं। हेल्पलाइन 24 घंटे खुली रहती है। यहां कॉल कर जानकारी ले सकते हैं। पीजीआई के एडवांस आई सेंटर में तीसरी मंजिल पर स्थित रूम नंबर 301 में संपर्क कर सकते हैं। यहां पर नेत्रदान शपथ पत्र का फार्म मिलेगा।
इसे भरकर जमा करने पर डाइविंग लाइसेंस के बराबर एक कार्ड मिलेगा, जो एक डोनर का कार्ड होगा, जिसमें डोनर और आईबैंक से संबंधित जानकारी और नंबर मिलेगा। इसी तरह से मेडिकल कालेज के आई बैंक के हेल्पलाइन नंबर 9814821212 पर कॉल कर आई डोनेशन संबंधित जानकारी ले सकते हैं। वहां के मेडिकल सोशल वर्कर राघवेंद्र कुमार राय से भी संपर्क कर सकते हैं, जो आई डोनेशन में काफी एक्टिव रहते हैं।