आखिरकार एमएसजी का सीईओ सीपी अरोड़ा टूट ही गया और उसने पुलिस के सामने ऐसे-ऐसे राज खोले कि राम रहीम और हनीप्रीत के कई नए सच सामने आ गए।
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पंचकूला हिंसा का आरोपी सीपी अरोड़ा
सोमवार की रात सीपी अरोड़ा ने रिमांड के दौरान हिंसा से जुड़े कुछ अहम खुलासे किए हैं। जिसके आधार पर पुलिस की नजर अब आदित्य इंसां की गिरफ्तारी पर है। एसआईटी को आदित्य इंसा कहां छुपा है, इसका सुराग नहीं मिला है। क्योंकि सीपी अरोड़ा और हनीप्रीत ने पूछताछ में पुलिस को गलत ठिकाने बताए। बताया जा रहा है कि दोनों की गिरफ्तारी नहीं हुई तो पुलिस गैर जमानती वारंट जारी करेगी। अब सीपी अरोड़ा न्यायिक हिरासत में है।
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हनीप्रीत के साथ राम रहीम
पुलिस सूत्रों के अनुसार, सीपी अरोड़ा और आदित्य इंसां गुरमीत राम रहीम के राइट और लेफ्ट हैंड माने जाते थे। आदित्य इंसां गुरमीत राम रहीम का बेहद करीब माना जाता है। राम रहीम जो भी फैसले लेता था, उनमें आदित्य और सीपी अरोड़ा की सहमती होती थी। 25 अगस्त को दोनों की ड्यूटी अलग अलग जगहों पर थी। सीपी अरोड़ा हैफेड के पास था। वहीं आदित्य इंसां के पास माजरी चौक से लेकर पंचकूला सेक्टर तीन का एरिया था।
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Ram rahim
गुरमीत राम रहीम को पंचकूला सीबीआई अदालत द्वारा दोषी करार दिए जाने के बाद पंचकूला के सेक्टर तीन से सटे हाईवे से हिंसा की शुरुआत हुई। जहां आदित्य इंसां की ड्यूटी थी। लेकिन यहां आदित्य इंसा मौजूद नहीं था। यहां उसके कुछ पांच से सात नुमाइंदे मौजूद थे। उसके इशारे पर पंचकूला में हिंसा और आगजनी की शुरुआत हुई। सारा खेल था फोन कॉल्स का।
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राम रहीम के साथ हनीप्रीत
अरोड़ा ने पुलिस रिमांड के दौरान माना था कि 17 अगस्त को डेरे में हुई मीटिंग में हनीप्रीत की प्रमुख भूमिका थी, जहां पर दंगों को लेकर पूरी योजना तैयार हुई। फिल्मों का पैसा दंगों में लगाने की बात भी रिमांड के दौरान सामने आई है। पुलिस की मानें तो विपासना और हनीप्रीत से पूछताछ के बाद सीपी अरोड़ा का नाम सामने आया था। जिसके बाद पुलिस ने सीपी अरोड़ा को फतेहाबाद से गिरफ्तार किया।
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राम रहीम के साथ हनीप्रीत
दूसरी ओर, पंचकूला हिंसा को दो महीने बीत चुके हैं, लेकिन अब तक साजिश का पूरी तरह पर्दाफाश नहीं हो सका है। हिंसा की प्लानिंग कब और कहां रची गई, यहां तक पुलिस पहुंच गई। लेकिन हिंसा की साजिश का मास्टरमाइंड कौन है, किसके इशारे पर हिंसा को अंजाम दिया और मुख्य साजिशकर्ताओं की गिरफ्तारी में देरी क्यों हो रही है। कई सवालों के जवाब अभी भी सुलग रहे हैं। इस हिंसा में 36 लोगों की मौतें हुईं। जबकि दर्ज 170 एफआईआर में से करीब 1100 लोगों को गिरफ्तार भी किया गया।
हिंसा से पंचकूला में मची तबाही के बाद आनन फानन में सरकार ने वाहन और संपत्ति के नुकसान के लिए मुआवजा देने की घोषणा कर दी। इस दौरान सरकारी और गैर सरकारी भवनों, सीसीटीवी कैमरे, चौराहे, होटल, बैंक सहित दर्जनों गाड़ियों को भी आग के हवाले कर दिया गया। इसमें हुए करोड़ों के नुकसान की भरपाई में हो रही देरी से भी लोगों की परेशानी बनी हुई है।