अब ब्रेन हैमरेज के बाद मरीजों को न तो पैरालिसिस होगा और न ही कोई और बीमारी होगी। यही नहीं अब इलाज भी दवाइयों से संभव होगा। जानिए आखिर कैसे...
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वरुण गुप्ता
- फोटो : अमर उजाला
पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ के यूआईपीएस विभाग के छात्र वरुण गुप्ता ने एक रिसर्च किया है। उन्होंने दवाओं के प्रभाव से होने वाले खतरों को 80 फीसदी तक कम कर दिया है। इस पर एनिमल स्टडी पूरी हो गई है। अब मानव स्टडी के लिए भारत सरकार को प्रोजेक्ट भेजा जाएगा। वरुण गुप्ता इस पर पांच साल से रिसर्च कर रहे हैं।
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ब्रेन स्ट्रोक
वरुण कहते हैं कि हर साल देश में छह मिलियन मौतें ब्रेन हैमरेज के कारण होती हैं। दुनिया में ब्रेन हैमरेज दूसरे नंबर की बीमारी है, जिससे सर्वाधिक मौत होती हैं। मस्तिष्क में खून जमा हो जाने या ब्लड नली के फट जाने से ब्रेन हैमरेज होता है। किसी व्यक्ति को इसका अटैक पड़ता है तो उसे तुरंत अस्पताल में पहुंचाना होता है।
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ब्रेन स्ट्रोक
ब्रेन हैमरेज होने पर 70 फीसदी मरीजों की मौत हो जाती है। 30 फीसदी को बचा लिया जाता है, लेकिन उन्हें आगे चलकर पैरालिसिस हो जाता है और ब्रेन हैमरेज फिर होने का खतरा मंडराने लगता है। इन सभी खतरों को टालने के लिए वरुण गुप्ता रिसर्च कर रहे हैं। इस रिसर्च का एनिमल मॉडल तैयार हो गया है।
रिसर्च के तहत, ब्रेन हैमरेज से पीड़ित चूहे का विभिन्न दवाओं के माध्यम से इलाज किया गया। चूहे का 48 और 72 घंटे तक इलाज किया गया था। साढ़े चार साल की रिसर्च में 80 फीसदी से अधिक सफलता मिल गई है। दवाओं के जरिए यह कारगर हुआ है, पर अभी दवाओं के नाम सार्वजनिक नहीं किए जा सकते हैं।