देश की सरहद पर रक्षा करते हुए अपनी जान देने वाले मनदीप की मां ने कहा है कि वो अपने बेटे की शहादत का बदला लेंगी।
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शहीद मनदीप के गांव में नहीं मनाई जाएगी दीवाली
देश की सरहद पर रक्षा करते हुए प्राण न्यौछावर करने वाले शहीद मनदीप सिंह का रविवार को हजारों नम आंखों की मौजूदगी में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार कर दिया गया।
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संस्कार से पहले शहीद मनदीप को पत्नी का सेल्यूट
बेटे मनदीप के शहीद होने का पता चलने पर एक बारगी तो मां निर्मला होश खो बैठी, लेकिन बाद में हौसला भी दिखाया।
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शहीद मनदीप की मां का दर्द
शहीद मनदीप सिंह की मां बोली कि अब पाकिस्तानियों को सबक सिखाने का समय आ गया है। उन्हें सबक सिखाने के लिए हर भारतीय को तैयार होना पड़ेगा।
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शहीद मनदीप की मां का दर्द
- फोटो : अमर उजाला
उन्होंने कहा कि उन्हें सरकार बार्डर पर भेज दे। वह अपने बेटे की शहादत का बदला लेंगी। इसके बाद वह फिर से फफक पड़ती हैं।
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शहीद मनदीप की मां का दर्द
रोते-रोते शहीद मनदीप सिंह की मां बोली कि कोई एक बार मेरे लाल को मेरे पास ला दे। सात महीने से उसका चेहरा नहीं देखा है। वह अपने लाल को कलेजे से लगाना चाहती है।
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संस्कार से पहले शहीद मनदीप को पत्नी का सेल्यूट
वहीं मनदीप के भाई संदीप ने कहा, ‘खून का बदला खून है। एक सिर के बदले दस सिर काटने चाहिए।’ पाक की शह पर आतंकियों ने मनदीप से जो बर्बरता की है, उससे पूरा देश गुस्से में है।
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शहीद मनदीप सिंह के घर पहुंचे सीएम मनोहर लाल खट्टर
- फोटो : ANI
मनदीप के शव की अंत्येष्टि उसके नए घर से सटे खेत में की गई। शहीद को अंतिम विदाई देने के लिए मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर सहित प्रशासन और पुलिस के तमाम आलाधिकारी मौजूद रहे।
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शहीद मनदीप सिंह की अंतिम यात्रा
शहीद को अंतिम विदाई देने के लिए पहुंची भीड़ का आलम यह था कि गांव की तमाम गलियों में कहीं पैर रखने की तक की जगह नहीं थी। ऐेसे में पुलिस को भी व्यवस्था बनाने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।
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शहीद मनदीप सिंह का अंतिम संस्कार
पाकिस्तान की घिनौनी करतूत के खिलाफ लोगों में जबर्दस्त गुस्सा था। छतों पर जमा युवा पाकिस्तान मुर्दाबाद, हिंदुस्तान जिंदाबाद, शहीद मनदीप सिंह अमर रहे और भारतीय सेना जिंदाबाद के नारे लगा रहे थे। महिलाएं भी इसमें पीछे नहीं थी। उन्होंने भी तब तक नारे लगाए जब तक मनदीप का पार्थिव शरीर पंचतत्व में विलीन नहीं हुआ।
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शहीद मनदीप सिंह की अंतिम यात्रा
सुबह करीब सवा दस बजे मनदीप का शव गांव पहुंचा। ताबूत को सीधे मनदीप के घर ले जाया गया। इस दौरान किसी भी व्यक्ति को अंदर नहीं जाने दिया गया। बताया जाता है कि घर के अंदर भी सिर्फ तीन लोगों ने ही मनदीप के शव को देखा। इसके बाद ताबूत को बाहर रखा गया।
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शहीद मनदीप सिंह का अंतिम संस्कार
तिरंगे में लिपटे पार्थिव शरीर पर मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर, राज्यमंत्री कर्णदव कांबोज, राज्यमंत्री कृष्ण कुमार बेदी, मुख्य संसदीय सचिव श्याम सिंह राणा, विधायक डॉ. पवन सैनी, विधायक सुभाष सुधा, पुलिस महानिदेशक केपी सिंह, आईजी सुभाष यादव, डीसी सुमेधा कटारिया ने पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।
शहीद मनदीप की पत्नी, हरियाणा पुलिस में कांस्टेबल प्रेरणा ने भी सैनिक धर्म निभाया। पति को अंतिम विदाई देते हुए वह और परिवार के अन्य लोग फूट-फूट कर रो रहे थे। इसके बावजूद प्रेरणा ने पति के पार्थिव शरीर को सैल्यूट करके विदाई दी।