पूर्णिमा यूं तो खगोलीय घटना है, लेकिन कहा जाता है कि इस दिन लोगों को ये एक काम नहीं करना चाहिए। अगर करेंगे तो मुसीबत झेलेंगे।
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lunar eclipse
दरअसल पूर्णिमा की रात मोटरसाइकिल दुर्घटना होने की आशंका अधिक रहती है। कनाडा की यूनिवर्सिटी ऑफ टोरंटो और अमेरिका की प्रिंसेटन यूनिवर्सिटी के एक संयुक्त अध्ययन में कहा गया है कि ड्राइविंग के दौरान हलका सा भी ध्यान भटकना बड़े हादसे का कारण होता है।
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Partial lunar eclipse
ऐसे में पूर्णिमा के कारण चांद अधिक बड़ा और रात को आसमान में अधिक चमकदार होता है। इसके चलते ड्राइवर में क्षणिक मनबहलाव यानी ध्यान भटकने की हल्की सी गुंजाइश भी सड़क हादसों को न्यौता देती है। मोटरसाइकिल सवार इससे अधिक प्रभावित होते हैं।
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Lunar eclipse
इसके लिए शोधार्थियों ने पूर्णिमा की रातों और साधारण रातों (पूर्णिमा के दिन और उसके एक हफ्ते के बाद वाले दिन) को होने वाली दुर्घटनाओं की संख्या का आंकलन किया। जिसमें पाया गया कि साधारण रातों की तुलना में पूर्णिमा की रात हुई दुर्घटनाओं की संख्या अधिक थी।
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चन्द्र ग्रहण
हिन्दू धर्म में माघ पूर्णिमा को बहुत खास माना जाता है। इस बार माघ पूर्णिमा 31 जनवरी 2018 दिन बुधवार को पढ़ रही है। इसी दिन चंद्रग्रहण लग रहा है। यह साल 2018 का पहला चंद्रग्रहण है। इससे कुछ घंटों पहले सूतक लग जाएगा। माना जाता है कि इस दिन चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से अमृत वर्षा करते हैं।
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चंद्र ग्रहण
- फोटो : SOCIAL MEDIA
धार्मिक ग्रन्थों के अनुसार, इस दिन स्नान और दान का विशेष महत्व है। इस दिन गंगा या किसी अन्य पवित्र में स्नान करना बहुत शुभ और लाभकारी माना जाता है। वहीं माघ पूर्णिमा की रात चावल से बनी खीर को छन्नी से ढ़ककर खुले आसमान में रखना चाहिए। दूध, चावल, चीनी इनका संबंध चांद और देवी लक्ष्मी से है। इस खीर को अगले दिन सुबह प्रसाद के रूप में ग्रहण करना चाहिए।
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lunar eclipse
पौराणिक मान्यता है कि इस खीर में अमृत का अंश होता है जो आरोग्य सुख प्रदान करता है। इसलिए स्वास्थ्य रूपी धन की प्राप्ति के लिए शरद पूर्णिमा की रात खीर बनाना चाहिए। जबकि आर्थिक संपदा के लिए शरद पूर्णिमा को रात्रि जागरण का विधान शास्त्रों में बताया गया है। यही कारण है कि इसे को-जागृति यानी कोजगारा की रात भी कहा गया है।
कहते हैं कि इस रात देवी लक्ष्मी सागर मंथन से प्रगट हुईं थी। इसलिए इसे देवी लक्ष्मी का जन्मदिवस भी कहते हैं। अपने जन्मदिन के अवसर पर देवी लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण के लिए आती हैं। इसलिए जो इस रात देवी लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा करते हैं उन पर देवी की असीम कृपा होती है। इस रात देवी लक्ष्मी की पूजा कौड़ी से करना बहुत ही शुभ फलदायी माना गया है। इस अवसर पर सत्यनारायण भगवान की पूजा का आयोजन कर सकते हैं।