पंजाब में गुरदासपुर संसदीय सीट से भाजपा की ओर से लोकसभा चुनाव 2019 लड़ने के लिए सनी देओल का नाम उछला। आखिर ऐसा क्यों, जानिए पांच कारण।
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सनी देओल
पहला, गुरदासपुर बीजेपी का गढ़ रहा है। एक्टर विनोद खन्ना इस सीट से चार पर सांसद रहे। हालांकि इसी सीट से कांग्रेस की सुखबंस कौर सर्वाधिक 5 बार सांसद रह चुकी हैं, लेकिन भाजपा के लिए यह सीट हॉट रही है और यहां भाजपा के पक्ष में काफी वोट बैंक भी है।
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दूसरा, 2017 में विनोद खन्ना के निधन के बाद गुरदासपुर सीट खाली हुई। उसके बाद गुरदासपुर में हुए उपचुनाव में भाजपा ने स्वर्ण सलारिया को उम्मीदवार बनाया। कांग्रेस के सुनील जाखड़ ने सलारिया को पराजित करके यह सीट छीन ली। ऐसे में सीट वापस हासिल करना बड़ी चुनौती है।
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सनी देओल
तीसरा, भाजपा किसी सेलिब्रिटी को ही इस सीट से चुनाव मैदान में उतारना चाहती थी। विनोद खन्ना भी सेलिब्रिटी थे और लोगों के चहेते एक्टर भी। 2014 के लोकसभा चुनाव में लोगों ने उन्हें काफी वोट देकर जिताया था। ऐसे में इस बार इस सीट से सेलिब्रिटी को उतारना ही फायदे में रहेगा।
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चौथा, विनोद खन्ना के निधन के बाद उनकी पत्नी कविता खन्ना उपचुनाव में टिकट चाह रही थीं, लेकिन दिया नहीं गया। अब लोकसभा चुनाव में उन्हें टिकट मिलने की उम्मीद थी, पर भाजपा परिवारवाद को बढ़ावा नहीं देना चाहती। एक्टर के बेटे अक्षय खन्ना ने भी चुनाव लड़ने में ज्यादा रुचि नहीं दिखाई थी।
पांचवा, सनी देओल का परिवार पंजाब से है। सनी देओल के पिता धर्मेंद्र और सौतेली मां हेमा मालिनी का राजनीति से पुराना नाता रहा है। धर्मेंद्र बीजेपी के टिकट पर 2004 में राजस्थान की बीकानेर सीट से चुनाव लड़ चुके हैं। वहीं उनकी सौतेली मां हेमा मालिनी अभी मथुरा से बीजेपी सांसद हैं।