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कभी साइकिल पर सामान बेचते थे रामदेव, अब 'करोड़पति'

Fri, 25 Dec 2015 08:46 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, चंडीगढ़
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क्या आप जानते हैं कि करोड़ों के पतंजलि ब्रांड के मालिक और योग गुरु बाबा रामदेव किसी समय में हरियाणा की गलियों में साइकिल पर सामान बेचा करते थे। देखिए, संघर्षगाथा।
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कभी साइकिल पर सामान बेचते थे रामदेव, अब 'करोड़पति'

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हरियाणा के महेन्द्रगढ़ जिले के अली सैयद्पुर गांव में जन्मे रामदेव का बचपन यहीं पर बीता। इनके बचपन का नाम रामकृष्ण था। शुरू से ही इन्हें योग में दिलचस्पी थी। आचार्य प्रद्युम्न व योगाचार्य बल्देवजी से संस्कृत व योग की शिक्षा ली। योग के प्रति लगाव के कारण एक दिन उन्होंने घर-बार छोड़कर ऋषिकेश जाने की ठान ली। युवावस्था में संन्यास लिया और पहले वाला रामकृष्ण, स्वामी रामदेव के नये रूप में बदल गया।
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रामदेव ने कुछ देर तक कालवा गुरुकुल, जींद जाकर नि:शुल्क योग सिखाया उसके बाद हिमालय में ध्यान और धारणा का अभ्यास करने निकल गए। वहां से सिद्धि प्राप्त कर प्राचीन पुस्तकों व पाण्डुलिपियों का अध्ययन करने हरिद्वार आकर कनखल के कृपालु बाग आश्रम में रहने लगे। यहीं उन्हें अपने जीवन का निर्णायक मोड़ मिला। एक धार्मिक टीवी चैनल ने उन्हें योग के एक प्रोग्राम में फीचर करना शुरू किया।

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बाबा ने टीवी के माध्यम से जनता तक योग की शक्ति को पहुंचाया। यहीं से बाबा रामदेव ने योग को एक बड़ा ब्रांड बनाने की शुरुआत कर दी। जैसे-जैसे योग से लोगों का जीवन बदलने लगा, वैसे-वैसे उनकी साख बढ़ने लगी। टीवी ने रामदेव को घर-घर पहुंचा दिया और पंतजलि योगपीठ की स्थापना कर योग को मानव-कल्याण की दिशा में कार्यरत किया। उनके आश्रम के बने प्रोडक्ट्स भी घरों में नजर आने लगे।

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एक टीवी रियल्टी शो में बाबा ने अपने बचपन के बारे में बताया था कि ‘मैं जब 9 वर्ष का था तो बहुत बीमार रहता था। बहुत मोटा भी था। सभी मुझे चिढ़ाते थे। फिर मैंने योग करना शुरू किया और तब से लेकर आज तक 5 बजे उठता आया हूं और परिणाम सबके सामने है।

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साल 2000 से आयुर्वेदिक दवाओं से शुरू होकर फूड प्रोडक्ट्स तक लोगों तक पहुंचाने का सिलसिला शुरू हुआ और बाबा रामदेव ने वॉलेंटियर्स के जरिए कारोबार को फैलाना शुरू किया। बाबा रामदेव के बिजनेस का ये सिलसिला अब कॉस्मेटिक से लेकर किराना तक पहुंच चुका है। अंदाजा है कि बाबा रामदेव के पतंजलि ब्रांड की ही कीमत आज की तारीख में 2000 करोड़ रुपये तक है।
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बाबा रामदेव की तरह उनकी आमदनी हमेशा से चर्चा का विषय रही है। साल 2009-2010 में बाबा रामदेव के ट्रस्ट का टर्नओवर 1100 करोड़ रुपये था। बाबा द्वारा आयोजित शिविरों में पंजीकरण के लिए 5000 रुपये लगते हैं और हर शिविर में कम से कम 50 हजार लोग पहुंचते हैं। बाबा को एक शिविर से लाखों का फायदा होता है। बाबा के पास एक हेलीकॉप्टर भी है, जिसे वे अपने एक शिष्य की भेंट बताते हैं।
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