किसान आंदोलन के समर्थन में आज हरियाणा के जींद में महापंचायत का आयोजन किया गया। पूरे देश की नजरें इस महापंचायत पर टिकी रहीं। हमेशा से ही हरियाणा में खाप पंचायतें काफी प्रभावशाली मानी जाती हैं। इन्हें कठोर निर्णय सुनाने के लिए जाना जाता है।
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खाप पंचायत
- फोटो : फाइल फोटो
खाप पंचायतें गांवों का एक सामुदायिक संगठन होती हैं, जो किसी खास जाति या गोत्र से मिलकर बनती हैं। हालांकि इनका कोई कानूनी आधार नहीं है और सुप्रीम कोर्ट भी इन्हे अवैध घोषित कर चुका है। इसके बावजूद खाप पंचायतें अपने समुदाय के अंदर अहम फैसले लेने में अहम भूमिका निभाती हैं। समाज के बनाए नियमों से इतर जाने वालों को खाप पंचायतें दंड सुनाती हैं। इनके तरफ से दिया जाने वाला सबसे बड़ा दंड सामाजिक बहिष्कार माना जाता है।
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महापंचायत
- फोटो : फाइल फोटो
इसके अलावा ये आर्थिक दंड भी लगाती हैं। ये कम से कम होता है। कई बार तो मात्र एक रुपया भी दंड के तौर पर अदा करने का आदेश दिया गया है। इस दंड का मकसद आर्थिक भार डालना नहीं होता, बल्कि इसे शर्मिंदगी के तौर पर लगाया जाता है। खाप पंचायत पुरुष प्रधान होती हैं। खापों के संगठन एवं नेता अनिर्वाचित होते हैं और सामाजिक प्रभुत्व के आधार पर इनका चयन होता है। वैसे खाप पंचायतें लगभग पूरे देश में हैं, लेकिन इनका ज्यादा प्रभाव उत्तर भारत के राज्यों हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान में ज्यादा देखने को मिलता है।
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कंडेला में महापंचायत
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
महापंचायत यानी बहुत बड़ी पंचायत। महापंचायत को सर्व खाप की पंचायत भी कहते हैं। जब कोई सामूहिक मसला होता है तो कई खापें मिलकर अपने एक-एक प्रतिनिधि को शामिल कर सर्व खाप बनाती हैं और उस मुद्दे को लेकर महापंचायत बुलाई जाती है।
हरियाणा में सबसे ज्यादा खाप पंचायतें जाटों की हैं। पिछले कुछ समय में खाप पंचायतों का प्रभाव घटा है, क्योंकि ये पारंपरिक पंचायतें हैं। इनकी कोई कानूनी मान्यता नहीं है। हरियाणा में सबसे बड़ी खाप 12 तपा की खाप है। इसके अलावा मलिक, कंडेला की खाप भी काफी महत्वपूर्ण हैं।