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ई-वे बिल के बारे में 10 ऐसी जानकारियां, जो शायद ही कोई बताए...यहां जान लीजिए

Sun, 22 Apr 2018 03:30 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक(हरियाणा)
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ई वे बिल - फोटो : SOCIAL MEDIA
एक अप्रैल से देश भर में ई-वे बिल लागू हो गया है, अब जानिए इसके बारे में 10 ऐसी बातें, जो हर किसी को जरूर पता होनी चाहिएं।
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ई वे बिल - फोटो : SOCIAL MEDIA
हरियाणा में जीएसटी विभाग के उप आबकारी एवं कराधान आयुक्त (बिक्री कर) सुरेश कुमार बोडवाल ने बताया कि एक अप्रैल से लागू हुए ई-वे बिल को लेकर प्लान तैयार किया गया। फिर व्यापारियों और ट्रांसपोर्टरों से मीटिंग करके उन्हें ई-वे बिल का उपयोग करने के बारे में जानकारी दी गई। अब अगर किसी व्यापारी या ट्रांसपोर्टरों को ई-वे बिल संबंधी समस्या है तो विभाग में आकर अधिकारियों से भी संपर्क किया जा सकता है।

 
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e way - फोटो : demo
यह है व्यापारियों की मुख्य दिक्कत
सुरेश कुमार बोडवाल ने बताया कि ई-वे बिल को लेकर समस्या है 24 घंटे में सौ किलोमीटर की दूरी तय करने की बाध्यता। ई-वे जनरेट करने के सभी साधनों की जानकारी नहीं होना। कई व्यापारियों का कंप्यूटर और इंटरनेट से परिचित नहीं होना। ट्रांसपोर्टेशन वाहन बदलने के साथ ही ई-वे बिल को अपडेट करना। ट्रक खराब होने या कहीं फंस जाने पर भी ई-वे बिल को अपडेट करना। ई-वे बिल के लिए माल की कीमत महज 50 हजार रुपये ही रखा जाना।

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demo pic - फोटो : अमर उजाला
सुरेश कुमार बोडवाल ने बताया कि ई-वे बिल 50,000 रुपये से अधिक के सामान को सड़क, रेल, वायु या जलमार्ग से एक राज्य से दूसरे राज्य में ले जाने पर लागू किया गया है। सामान की ढुलाई से पहले ई-वे बिल तैयार किए जाने चाहिए। इसमें कन्साइनर, कंसाइनी और ट्रांसपोर्टर से संबंधित विवरण हो। ट्रांसपोर्टर सामान्य पोर्टल पर नामांकन कर सकता है और अपने ग्राहकों के लिए ई-वे बिल तैयार कर सकता है।

 
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E-Way Bill
कोई भी व्यक्ति ई-वे बिल का नामांकन कर सकता है और उसे जेनरेट भी कर सकता है। ई-वे बिल जेनरेट करने की पहली शर्त तो यही है कि जीएसटी पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन हो। अगर ट्रांसपोर्टर रजिस्टर नहीं है तो ई-वे बिल पोर्टल https://ewaybillgst.gov.in पर पंजीकृत होना जरूरी है। इसके लिए उसके पास टैक्स इनवॉइस, बिल या डिलिवरी चालान और वस्तु व सामान ट्रांसपोर्ट कर रहे ट्रांसपोर्टर की आईडी होना जरूरी है।
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e way bill - फोटो : अमर उजाला
ट्रांसपोर्टर डॉक्यूमेंट नंबर या वाहन नंबर होना जरूरी है। अगर ई-वे बिल में किसी भी तरह की गलती हो जाती है तो आप उसे सुधार नहीं सकेंगे। ऐसी स्थिति में आपको जिस ई-वे बिल में गलती हुई है, उसे रद्द करना होगा और नया ई-वे बिल जेनरेट करना होगा। यदि एक ट्रांसपोर्टर के पास एक ही वाहन में कई कंसाइनमेंट हैं तो वह जीएसटी ईडब्ल्यूबी -02 फार्म का उपयोग एक पूरा ई-वे बिल बनाने के लिए कर सकता है।
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e way bill - फोटो : अमर उजाला
अगर कोई ई-वे बिल जेनरेट करने में समर्थ नहीं है तो ट्रांसपोर्टर उसकी तरफ से ई-वे बिल जेनरेट कर सकता है। ई-वे बिल की वैधता माल के परिवहन की दूरी पर निर्भर करती है। वैधता 100 किमी तक 24 घंटे है और प्रत्येक 100 किमी या इसके बाद के समय के लिए यह एक अतिरिक्त दिन होगा। यह उन मामलों में भी लागू होगा जहां यात्रा रुक-रुक कर पूरी होगी और माल ढुलाई में एक से अधिक ट्रांसपोर्टर शामिल होंगे।

 
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