19 साल की नौकरी के बाद CRPF के इस जवान को इसी साल अक्टूबर में रिटायर होकर घर आना था, लेकिन उससे पहले अब उसकी शहादत की खबर ने पूरे परिवार को एक झटके में तोड़ कर रख दिया है।
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छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में सोमवार को सीआरपीएफ पर हुए नक्सलियों के हमले में शहीद हुए जवान राममेहर महज 6 दिन बाद घर छुट्टी आने वाले थे। इससे पहले ही सोमवार देर रात को उनके घर उनकी शहादत की खबर पहुंची।
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इतना पता चलते ही पूरे परिवार में मातम छा गया। करनाल के खेड़ी मानसिंह गांव के रहने वाले राममेहर 6 भाईयों में चौथे नंबर के थे।
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राममेहर पिछले 19 साल से देश की सेवा कर रहे थे और इस साल अक्टूबर में रिटायर होकर आने वाले थे। शहीद राममेहर की पत्नी पूनम और बेटा रोहित व बेटी लविशा करनाल रहते हैं।
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गांव में राममेहर की शहादत की सूचना रात में ही पहुंच गई थी लेकिन परिवार वालों ने उसकी पत्नी को सुबह घर बुलाने के बाद सूचित किया। राममेहर के परिजनों ने बताया कि उसकी पत्नी पूनम से तीन दिन पहले ही फोन पर बात भी हुई थी।
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राममेहर 1 मई को छुट्टी आने वाला था, उसी को लेकर आखिरी बार बात हुई थी। राममेहर के पिता पूर्ण संधू का कहना है कि उसके बेटे की मौत के लिए सरकार दोषी हैं, सरकार उग्रवादियों के खिलाफ खुली कार्रवाई के आदेश नहीं देती। तभी आए दिन लोग शहीद हो रहे हैं।
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राममेहर के भाई राज कुमार पूर्व सैनिक है और इस समय हरियाणा पुलिस में कार्यरत है। उनका कहना है कि भाई पेट्रोलिंग में था वहीं आईईडी ब्लास्ट में भाई शहीद हो गया।
गौरतलब है कि अभी कुछ दिन पहले हुए आई आई डी ब्लास्ट में भी राममेहर काफिले में थोड़ी दूर होने के कारण बच गया था, लेकिन इस बार भाग्य ने साथ नहीं दिया और वो शहीद हो गए।