मेरा बेटा बचपन से ही बहादुर था और देशसेवा करने का जज्बा उसके दिल में था। वह पढ़ते-पढ़ते ही आर्मी में भर्ती हो गया था। मुझे इस बात पर गर्व है मेरा बेटा देश के 11 दुश्मनों को मारकर शहीद हुआ। पवित्र जैसे बहादुर देश पर मर मिटने वाले बच्चे सभी माताओं की कोख से पैदा हों ताकि देश की सेवा कर सकें। सुजानी देवी, शहीद की मां पवित्र कुमार बचपन से ही विनम्र स्वभाव के थे। घर वाले अगर किसी बात पर गुस्सा हो जाते थे तो पवित्र कुमार उसका जवाब हंसते हुए देते थे। वर्ष 1985 में जब उसके पिता किताब सिंह 7 केवलरी आर्मी से सेवानिवृत्त हुए तब उनसे ही पवित्र में सेना में भर्ती होने व देश की सेवा करने का जज्बा पैदा हो गया। प्रदीप व सवित्र, शहीद के भाई।