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बर्तन धोने-भैंस चराने को मजबूर हुई ये अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी, आखिर क्यों?

Fri, 30 Jun 2017 09:55 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, टोहाना(हरियाणा)
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बर्तन धोने को मजबूर अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी
देश को गोल्ड मेडल दिलाने के बाद आज ये अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी बर्तन धोने-भैंस चराने को मजबूर है। जानिए क्यों?
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सरकार ने अनदेखी से नाराज खिलाड़ी अब संभाल रही
कबड्डी के क्षेत्र में देशभर में 2012 से 2016 तक अपना लोहा मनवा चुकी विश्व कप विजेता टीम की सदस्य रहीं रामभतेरी गिल ने सरकार की अनदेखी से नाराज होकर कबड्डी खेल को अलविदा कह दिया। 
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Rambhteri Gill
रामभतेरी अब घर का चौका-चूल्हा संभाल रही हैं। कभी कबड्डी में देश-प्रदेश का नाम रोशन करने वाली रामभतेरी अब पशुओं के लिए चारा काटती हैं, डालती हैं और घर के काम में मां का हाथ बंटाती हैं।

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Rambhteri Gill
अमर उजाला ने जब कबड्डी खिलाड़ी रामभतेरी से इस नाराजगी की वजह जानना चाहा तो खिलाड़ी और उसके परिजनों ने कहा कि इतनी कामयाबी के बावजूद उसे नौकरी तो मिली नहीं। सरकार ने उसकी उपेक्षा ही की। पिता ने कहा कि अब उसकी शादी तो करवानी ही है, इसलिए घर के कामों में भी उसे पारंगत करना पड़ेगा। रामभतेरी भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला के गृहक्षेत्र टोहाना के गांव समैण की निवासी है।
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Rambhteri Gill
कबड्डी खिलाड़ी रामभतेरी के कोच राजबीर गिल का अरोप है कि सरकार का बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा सिर्फ कागजों में है। खेल मंत्री अनिल विज सिर्फ अंबाला जिले के बारे में सोचते हैं। उन्होंने बताया कि एक बार वे रामभतेरी व खिलाड़ियों को लेकर खेल मंत्री अनिल विज से मिलने गए, लेकिन वहां पर उन्हें सिर्फ धक्के मिले। 
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Rambhteri Gill
उन्होंने बताया कि रामभेतरी एक गरीब व साधारण परिवार से है, लेकिन जो रामभतेरी ने अपनी मेहनत के बल पर कर दिखाया है उसके बदले में उसे सिर्फ आश्वासन के बिना कुछ नहीं मिला। गिल ने कहा कि इसके चलते गांव के अन्य खिलाड़ियों की आस भी टूटी है। इस संबंध में वे टोहाना विधायक व भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला से भी गुहार लगाई थी कि खिलाड़ी रामभतेरी को नौकरी दी जाए, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो सकी। 
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बर्तन धोने को मजबूर अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी
रामभेतरी के पिता रघुवीर ने बताया कि उनके पास महज डेढ़ एकड़ जमीन है और ठेके पर जमीन लेकर गुजारा करते हैं। सालों के बाद भी उनकी लड़की को सरकार ने कोई सहायता नहीं दी है। मजबूरीवश अब रामभतेरी घर में रहकर घरेलू काम करती है ताकि उसकी शादी की जा सके। रामभतेरी के पिता रघुवीर ने कहा कि सरकार से उनकी आस टूट चुकी है। 

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बर्तन धोने को मजबूर अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी
खेल को छोड़कर घरेलू कामों में जुटने के बारे में कबड्डी खिलाड़ी रामभतेरी से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उसने सोचा था कि खेल के माध्यम से उनका और उनके परिवार का जीवन सुधरेगा, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। दिनरात एक करके मैं देश के लिए मेडल लेकर आई। बावजूद परिवार के पास पर्याप्त संसाधन नहीं हो सके। ऊपर से मेरी ट्रेनिंग और खेल का खर्च और। अब परिवार ने फैसला किया है कि खेल को छोड़कर घरेलू कामों में ध्यान लगाऊं और मैं अपने परिवार के साथ हूं।
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बर्तन धोने को मजबूर अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी
कबड्डी खिलाड़ी रामभतेरी की उपलब्धियां
साल 2012 में पंजाब में आयोजित कबड्डी विश्व कप विजेता टीम की सदस्य। 
साल 2013 में आयोजित महिला कबड्डी वर्ल्ड कप में बेस्ट रेडर चुनी गई। 
2014, 2015 और 2016 में भी महिला कबड्डी विश्वकप विजेता टीम की सदस्य रही।  
खाली समय पर गांव की अन्य युवतियों को भी कबड्डी के गुर सिखाती है।  
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