‘पाक में मेरी परछाई थी, सामने अब्बू थे, पीछे सूरज था। मैं रिफ्यूजी था। बस चलते रहना था। जैसे ही वाघा बार्डर पार किया तो जैसे लगा कि बचपन पाक में रह गया हो। रूह और शरीर दोनों अलग-अलग हो गए हो...
विज्ञापन
2 of 7
Gulzar
...मैं कई वर्षों बाद जब अपनी जन्मभूमि पाकिस्तान पर लौटा तो देखा गांव का छप्पर वैसा ही था। मेरा पुश्तैनी पर कोई और परिवार रह रहे थे। मुझे जिसने देखा वो मेरे से अलग होने का नाम नहीं ले रहा था। मैं चाहता था कि मैं कुछ देर एकांत में बैठकर दिल का गुबार निकालूं और रो सकूं, लेकिन ऐसा संभव नहीं हो सका।’
विज्ञापन
3 of 7
Gulzar
18 अगस्त, 1936 को पंजाब (पाकिस्तान अधीन) में जन्म लेने वाले संपूर्ण सिंह कालड़ा भी दोनों मुल्कों के लाखों विस्थापित परिवारों की तरह गुमनामी में जी रहे होते, लेकिन किस्मत में कुछ और लिखा था।
4 of 7
गुुलज़ार की नज्में
आज संपूर्ण सिंह कालड़ा को लोग गुलजार के नाम से जानते हैं। फिल्मी दुनिया से लेकर साहित्यिक क्षेत्र में उनकी लिखी हर पंक्तियां इबारत बन जाती हैं। लेकिन आज जब गुलजार ने दोनों मुल्कों के विभाजन पर विश्व के पहले पार्टीशन म्यूजियम में कदम रखा तो उनकी आंखें सजल हो उठी। जुबां खामोश थी।
विज्ञापन
5 of 7
Gulzar
गुलजार ने म्यूजियम में भारत-पाक से जुड़ी यादें देखीं तो काफी देर तक वो निहारते रहे। कहने लगे कि इतनी जल्दी समय बीत गया पता ही नहीं चला। दोनों मुल्कों के बीच ऐसे म्यूजियम बनाए जाना चाहिए। मैं पाक से अपील करता हूं कि विभाजन की निशानी वो संभाल कर रखें और भारत में हम संभाल ही रहे हैं। दोनों मुल्कों को बंटवारे के बाद प्यार व मुहब्बत से रहना चाहिए।
विज्ञापन
6 of 7
Gulzar
गुलजार की नई किताब ‘जीरोलाइन’ का विमोचन मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह, निकायमंत्री नवजोत सिंह सिद्धू ने किया। इस मौके पर सियासत से जुड़ी कई बड़ी हस्तियां मौजूद थी। गुलजार ने नई किताब से कई नज्में पढ़ी तो मुख्यमंत्री समेत सभी ने तालियां जमकर बजाईं।
‘राष्ट्रगान पर विवाद नहीं होना चाहिए’
गुलजार कहते हैं कि राष्ट्रगान पर विवाद नहीं होना चाहिए। अगर मेरे हाथ में होता तो मैं जरूर इस मुद्दे पर बोलता। लेकिन एक बात कहना चाहता हूं कि देश से प्रेम करो और भारत मां का सम्मान करो। मजहब से ऊपर इंसानियत है।