आरक्षण की आग में झुलसे हरियाणा में एक जाट ऐसा भी था, जिसके पास JNU की डिग्री थी और वह देश के लिए जम्मू में शहीद हो गया।
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एक जाट ये भी...JNU की डिग्री और देश के लिए दी शहादत
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कैप्टन पवन हरियाणा के जींद जिले के निवासी तो थे, साथ ही उन्होंने डिग्री जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) से हासिल की थी। उनका जन्म भी सेना दिवस 15 जनवरी 1993 को हुआ था। श्रीनगर-जम्मू हाईवे पर स्थित पंपोर इलाके में आतंकियों से लोहा लेते वक्त शहीद कैप्टन पवन कुमार का शव सोमवार को हवाई मार्ग से हरियाणा के जींद पहुंचेगा। आर्मी ने हरियाणा के निवासियों से विशेष तौर पर अपील की है कि बहादुर बेटे की अंतिम विदाई में सहयोग करें।
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10 पैरा रेजिमेंट के शहीद कैप्टन पवन कुमार की दिलेरी का अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि वे जिस आपरेशन में हिस्सा लेते थे, वह पूरी तरह से सफल होता था। जिन दो आपरेशनों में उन्होंने हिस्सा लिया था, उसमें तीन आतंकवादी मारे गए थे। जिस वक्त वे शहीद हुए उस दौरान वे एक छोटी कंपनी को लीड कर रहे थे। उनका एक ही मकसद था कि इस आपरेशन में किसी भी नागरिक की मौत न हो। उन्होंने 14 दिसंबर 2013 में आर्मी ज्वाइन की थी।
एक जाट ये भी...JNU की डिग्री और देश के लिए दी शहादत
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शहीद 23 साल के कैप्टन पवन कुमार माता पिता के इकलौते संतान थे लेकिन आतंकवादियों से लोहा लेते हुए शहीद होने पर उनके माता-पिता तथा दादा को बेटे पर नाज है। शहीद पवन के पिता राजबीर सिंह ने कहा कि बेटे को देश की सेवा के लिए ही पैदा किया था और आज देश के लिए ही इकलौते बेटे को न्योछावर कर दिया। पिता ने बताया कि जहां पवन शहीद हुआ है वहां कुछ दिन पहले ही वे दो बार कामयाब ऑपरेशन कर चुके थे। वहां उन्होंने 3 आतंकी मार गिराए थे।
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शहीद पवन का परिवार जींद के अर्बन स्टेट में रहता है। परिवार में माता-पिता और बुजुर्ग दादा हैं। पिता राजबीर जींद के बुढ़ाखेड़ा के सरकारी स्कूल में हेडमास्टर हैं जबकि मां कमलेश जींद के खोखरी के सरकारी स्कूल में टीचर हैं। बुजुर्ग दादा घर पर ही रहते हैं। पौत्र की शहादत की सूचना आई तो दादा पवन खटकड़ की आंखें नम हो गई। मां कमलेश का कहना है कि पवन को शुरू से ही आर्मी में जाने का शौक था और आज यह जांबाज लड़ते-लड़ते ही देश के लिए शहीद हुआ।