अब जो भी सेना में जाएगा, वो बेटे की शहादत का बदला लेने के लिए जाएगा। एक सिर के बदले जब तक 10 सिर नहीं जाएंगे, चैन नहीं आएगा हमें।
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पाकिस्तानी सेना की फायरिंग में मारे गए परमजीत सिंह
ये कहना है शहीद परमजीत सिंह की बेटियों और गांव वालों का। परमजीत के शव के साथ पाकिस्तान ने जो बर्बरता की, उसके खिलाफ गांव वालों में काफी गुस्सा है। गांव वालों का कहना है कि पाकिस्तान भारतीय सैनिकों पर हमला करके मार देता है, परंतु उनके सिर काटकर ले जाने कोई बहादुरी नहीं है। अब गांव से जो सेना में जाएगा, परमजीत सिंह की शहादत का बदला लेने के लिए जाएगा।
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पाकिस्तानी सेना की फायरिंग में मारे गए परमजीत सिंह
शहीद के परिजनों का कहना है कि भारत सरकार पाकिस्तान के इस कदम का मुंहतोड़ जवाब दे। भारत को भी पाकिस्तानी सैनिकों के सिर काटकर लाने चाहिए। शहीद के भाई रणजीत सिंह ने कहा कि भारत सरकार को हर शहीद की शहादत का हिसाब देना होगा। हर बार सेना के वीर जवानों को ढाल बनाकर मात्र वोट की राजनीति करने वाले नेता ही देश के वीर जवानों के इस हश्र के जिम्मेदार हैं।
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पाकिस्तानी सेना की फायरिंग में मारे गए परमजीत सिंह
तरनतारन और देवरिया (यूपी) में शहीदों के शव पहुंचते ही उनके परिजनों में पाकिस्तान के खिलाफ जबर्दस्त आक्रोश देखा गया। तरनतारन के शहीद नायब सूबेदार परमजीत सिंह के भाई रंजीत सिंह ने कहा कि भारत सरकार को हर शहीद की शहादत का हिसाब देना होगा। हर बार मात्र वोट की राजनीति करने वाले नेता ही वीर जवानों के इस हश्र के जिम्मेदार हैं। सरकार को एक के बदले पाकिस्तानी सैनिकों के 10 सिर लाने चाहिए।
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पाकिस्तानी सेना की फायरिंग में मारे गए परमजीत सिंह
तरनतारन में मंगलवार को पूरे सैन्य सम्मान के साथ खडूर साहिब क्षेत्र स्थित शहीद परमजीत सिंह के पैतृक गांव वई पुई में उनका अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान पूरा गांव देशभक्ति और ‘नायब सूबेदार परमजीत सिंह अमर रहे’ के नारों से गूंज उठा। 42 वर्षीय परमजीत सिंह सेना की 22वीं सिख इंफैंट्री में थे। वे अपने पीछे माता-पिता के अलावा पत्नी, एक बेटा और दो बेटियों को छोड़ गए हैं।
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पाकिस्तानी सेना की फायरिंग में मारे गए परमजीत सिंह
वहीं अंतिम संस्कार से पूर्व शहीद की पत्नी ने प्रशासनिक अफसरों से दो टूक कहा कि वह तब तक अपने पति का अंतिम संस्कार नहीं करेंगी, जब तक उनके सभी अंग नहीं दिखाए नहीं जाते। इस पर सेना और जिले के अधिकारियों ने किसी प्रकार परिवार को समझाया। फिर वे अंतिम संस्कार को राजी हुए। शहीद के पार्थिव शरीर को उनके बेटे साहिलदीप सिंह ने मुखाग्नि दी।
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पाकिस्तानी सेना की फायरिंग में मारे गए परमजीत सिंह
शहीद की मां जोगिंदर कौर ने बताया कि मेरे बेटे ने फोन पर मुझसे बातचीत की थी। वह मुझे कह रहा था, ‘मां इत्थे खतरा तां बोत ऐ, पर तेरा ऐह लाल घबराउण वाला नी।’ बेटे की तस्वीर को पकड़ फफक रो पड़े पिता ऊधम सिंह ने बताया कि उसका लाल बहुत दिलेर था, लेकिन ऐसा कभी भी नहीं सोचा था कि उसका यह हश्र होगा। 10 मई को उसे दोबारा दो माह की छुट्टी पर लौटना था।
पाकिस्तानी सेना की फायरिंग में मारे गए परमजीत सिंह
वहीं शहीद परमजीत के गांव वालों ने मांग की कि सरबजीत सिंह कि परिजनों को सरकार ने एक करोड़ की आर्थिक सहायता दीं थी, उसी प्रकार शहीद परमजीत सिंह के परिजनों को भी एक करोड़ की सहायता राशि बतौर मुआवजा प्रदान की जाए। सरकार शहीद के बच्चों की शिक्षा और परवरिश की सारी जिमेदारी उठाए। इतना ही नहीं गांव में शहीद परमजीत सिंह के नाम पर स्टेडियम का निर्माण भी कराया जाना चाहिए।