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शहीद परमजीत के परिजनों का अंतिम संस्कार से इंकार, अफसरों की विनती के बाद माना

Wed, 03 May 2017 01:56 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, तरनतारन(पंजाब)
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पाकिस्तानी सेना की फायरिंग में मारे गए परमजीत सिंह
शहीद परमजीत सिंह का पार्थिव शरीर जैसे ही घर पहुंचा, परिजनों ने अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया। अफसरों ने विनती की तब जाकर वे माने।
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पाकिस्तानी सेना की फायरिंग में मारे गए परमजीत सिंह
नायब सूबेदार परमजीत सिंह का पार्थिव शरीर तरनतारन जिले के गांव वई पुई पहुंच। जैसे ही शव पहुंचा, घर में कोहराम मच गया। परिजनों का रो रो कर बुरा हाल है। वहीं परिजनों ने कह दिया था कि जब तक पूरा शरीर नहीं मिलेगा, वे अंतिम संस्कार नहीं करेंगे। इसके बाद सेना के अफसरों ने उनसे बातचीत की और समझाया।
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पाकिस्तानी सेना की फायरिंग में मारे गए परमजीत सिंह
पाकिस्तानी सेना की फायरिंग में मारे गए परमजीत सिंह को 28 अप्रैल को छुट्टी पर आना था, लेकिन वे नहीं आए। क्योंकि उनके दोस्त को तुरंत छुट्टी चाहिए थी, इसलिए उन्होंने अपनी छुट्टी मई के दूसरे हफ्ते तक के लिए स्थगित कर दी ​थी। शायद किस्मत को यहीं मंजूर था, पर उस दोस्त को सारी जिंदगी परमजीत सिंह ये जिंदादिली याद रहेगी।

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जवानों के शव के साथ बर्बरता
गांव के सरपंच रंजीत सिंह राणा ने बताया कि परमजीत सिंह 5 महीने पहले घर आया था। उनके पिता उधम सिंह एक किसान हैं और उनके दो भाई भाई चरणजीत सिंह और रंजीत सिंह  शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी में काम करते हैं। परमजीत के परिवार में तीन बच्चे हैं। परमजीत सिंह की 17 वर्षीय बड़ी बेटी सिमरनदीप कौर मैट्रिक, 13 वर्षीय बेटी खुशदीप कौर और 10 वर्षीय बेटा साहिलदीप सिंह श्री गोइंदवाल साहिब में पढ़ाई करते हैं।
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जवानों के शव के साथ बर्बरता
साल 2000 में भारतीय फौज में भर्ती हुए परमजीत सिंह की शादी गांव लालपुरा निवासी परमजीत कौर के साथ हुई थी। वहीं बेटे की शहादत गर्व करने वाली मां की आंखों में बेटा खोने का दर्द भी है। विलाप कर रही मां जोगिंदर कौर ने कहा कि कल ही परमजीत का फोन आया था, बात करते हुए बोला माएं एत्थे खतरा तां बहुत ऐ, पर तेरा लाल घबराण वाला नहीं। बेटे इतना कहते ही फफक कर पड़ीं।
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जवानों के शव के साथ बर्बरता
भरी आंखों से शहीद के पिता उधम सिंह बोले कि उनका परमजीत दलेर था, परंतु ऐसा कभी भी नहीं सोचा था कि देश के लिए आपा कुर्बान कर जाएगा। वहीं गांव वालों का कहना है कि पाकिस्तान भारतीय सैनिकों पर हमला करके मार देता है, परंतु उनके सिर काटकर ले जाने कोई बहादुरी नहीं है। अब गांव से जो सेना में जाएगा, परमजीत सिंह की शहादत का बदला लेने के लिए जाएगा।

 
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पाकिस्तानी सेना की फायरिंग में मारे गए परमजीत सिंह
शहीद के भाई रंजीत सिंह ने कहा कि गांव में ये पहली शहादत है। जिस पर हमें गर्व तो है, लेकिन दुख इस बात का है कि मोदी सरकार कुछ करने की क्षमता में नहीं। उन्होंने कहा कि जवानों को शहीद करके उनके सिरों को काट लिया जाता है। बावजूद इसके यदि भारतीय फौज चुप्प बैठे तो आने वाले समय में ओर नुकसान होगा। आए दिन पाकिस्तान द्वारा भारतीय जवानों को शहीद किया जा रहा है, लेकिन 56 इंच वाला सीना दिखाई नहीं देता।
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