आखिर ऐसा क्या हुआ, जिससे ये महिलाएं सड़क किनारे भीख मांगने पर मजबूर हो गईं। तस्वीरें पंचकूला की हैं। - रिपोर्ट: दिनेश कुमार।
विज्ञापन
देखिए, भीख मांगने को क्यों मजबूर हुईं ये महिलाएं?
2 of 8
पंचकूला के सेक्टर-5 में जीबीटी पात्र अध्यापक अनशन पर बैठे हैं, क्योंकि उन्हें आशंका है कि सरकार 2012 में एचटेट की परीक्षा पास करने वालों को छोड़कर शेष उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र थमाने जा रही है। खास बात यह है कि इन अनशनकारियों में एक चौथाई से ज्यादा शिक्षामंत्री रामबिलास शर्मा के जिले महेंद्रगढ़ से हैं। इनकी मांग है कि 1750 पात्र अध्यापकों को शामिल करके ही भर्ती का परिणाम घोषित किया जाए।
विज्ञापन
देखिए, भीख मांगने को क्यों मजबूर हुईं ये महिलाएं?
3 of 8
पंचकूला में 4 जनवरी 2015 से प्रदेश भर से करीब 200 पात्र अध्यापक धरना दे रहे हैं। इसके साथ ही 24 पात्र अध्यापक अपनी मांगों को लेकर आमरण अनशन पर बैठे हैं। इनमें से 7 अकेले महेंद्रगढ़ जिले से हैं। महेंद्रगढ़-भिवानी लोकसभा क्षेत्र से कुल 13 युवा अनशन कर रहे हैं।
देखिए, भीख मांगने को क्यों मजबूर हुईं ये महिलाएं?
4 of 8
नवंबर 2013 में विज्ञापन के जरिए 9870 जेबीटी की भर्तियां निकाली थीं। हरियाणा शिक्षक भर्ती बोर्ड ने इस भर्ती में 2012-13 के सत्र में एचटेट की परीक्षा पास करने वाले 1750 पात्र अध्यापकों को शामिल नहीं किया। इस पर इनमें से कुछ ने अदालत का दरवाजा खटखटाया।
विज्ञापन
देखिए, भीख मांगने को क्यों मजबूर हुईं ये महिलाएं?
5 of 8
संघ के प्रधान संजय तालू ने कहा कि अदालत ने 23 अक्तूबर 2013 को फैसला सुनाया था कि जेबीटी भर्ती प्रक्रिया में एचटेट 2012-13 के परिणाम को शामिल किया जाए। अदालत के इस फैसले पर बोर्ड ने भर्ती का दोबारा विज्ञापन निकालकर 19 से 29 नवंबर 2013 तक उनके आवेदन मांगे।
विज्ञापन
देखिए, भीख मांगने को क्यों मजबूर हुईं ये महिलाएं?
6 of 8
इसके बावजूद 14 अगस्त 2014 को जारी किए परिणाम में इन 1750 उम्मीदवारों को शामिल नहीं किया गया। परिणाम के साथ ही अंत में एक लाइन लिखी गई कि यदि अदालत की तरफ से 2012-13 में एचटेट करने वालों के पक्ष में फैसला आता है तो परिणाम दोबारा घोषित किया जाएगा और पहले वाली सूची से उन अभ्यर्थियों को बाहर निकाला जाएगा जो उन अभ्यर्थियों की जगह पर होंगे।
विज्ञापन
देखिए, भीख मांगने को क्यों मजबूर हुईं ये महिलाएं?
7 of 8
उधर, अनशनकारियों का कहना है कि परिणाम घोषित होने और नियुक्ति पत्र देने के बाद किसी को नौकरी से नहीं हटाया जा सकता है। इसलिए उन्हें भी इस सूची में शामिल कर इकट्ठा परिणाम घोषित किया जाए।
पात्र अध्यापकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने वीरवार को शिक्षामंत्री से मुलाकात कर अपनी मांग रखी। संघ के प्रधान संजय तालू के मुताबिक इस मुलाकात के दौरान शिक्षामंत्री ने उन्हें कोई ठोस आश्वासन नहीं दिया, जिससे उन्हें मायूसी हाथ लगी।