हरियाणा में शादियों पर जाट आंदोलन का गहरा असर दिखाई दे रहा है। कहीं दुल्हन एंबूलेंस में विदा हुई तो कहीं फेरे एक दिन पहले हो गए। देखिए, 5 ऐसी शादियां।
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5 ऐसी शादियां, जिसमें दूल्हा-दुल्हन जाट आंदोलन के शिकार
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करनाल के सेक्टर-9 स्थित पाठक परिवार की बेटी की शादी 18 फरवरी को थी। आंदोलनकारियों से बचने के लिए बेटी ने न तो सोलह शृंगार किए और न ही शादी वाली ड्रेस पहनी। बारात रोहतक शहर से आनी थी। रोहतक से करनाल आने के सभी रास्ते बंद होने के कारण रोहतक से दूल्हा और बारातियों ने रोहतक से चार एंबुलेंस ली और फर्जी मरीज बनाकर उन्हें दिल्ली के लिए रेफर कराया। दूल्हे को भी सामान्य कपड़े पहनाए और बाद में एंबुलेंस से ही विदा कर दिया।
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आदमपुर के शिव कालोनीवासी कमल और नीरज सैनी 2 भाइयों की शादी तय की गई थी। कमल की शादी 17 फरवरी को सिरसा निवासी सुमन के साथ हुई, जबकि नीरज सैनी की शादी भिवानी निवासी प्रियंका के साथ 21 फरवरी को आदमपुर में होनी थी। जाट आरक्षण के चलते दुल्हन पक्ष के लोगों ने आदमपुर आने में असमर्थता जताई। शादी पर खतरा मंडराता देख दूल्हा पक्ष शादी से 1 दिन पहले भिवानी पहुंचे। नीरज ने विधि-विधान से फेरे लिए और दुल्हनियां ले आया।
5 ऐसी शादियां, जिसमें दूल्हा-दुल्हन जाट आंदोलन के शिकार
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कालवा गांव के कमल ने बताया कि उसके घर तीन बेटियों का सामूहिक विवाह था। 19 फरवरी को बरात गन्नौर से आई। डोली रवाना होने लगी तो पता चला कि सभी रास्तों को बंद कर दिया है। लड़की वालों ने बरातियों को भेजना खतरे से खाली नहीं समझा। 2 दिन तक बरात चौपाल में ही ठहरी रही। आखिरकार रविवार शाम को गांव से करीब 60 बाइकें बुलाई। प्रत्येक बाइक वाले को एक चक्कर छोड़ने पर दो सौ रुपए किराए के रूप में दिए। इस तरह बारात घर पहुंची।
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दिल्ली रोड पर जाम में रोहतक से दिल्ली की ओर जा रही दूल्हे अनिल और दुल्हन ज्योति की कार को रोक लिया गया। जब युवाओं से रास्ता देने की अपील की गई तो उन्होंने किनारे से कुछ झाड़ियों को हटाकर जाने को कहा। वहीं, जाट कॉलेज के बाहर छात्रों ने रोड जाम कर रखा था। तभी यहां एक बारात और बैंड वाले पहुंचे। छात्रों ने बैंड वालों को रोक लिया और सड़क पर ही बैंड बजाने को कहा। काफी देर तक बैंड बजाने के बाद छात्रों के कहने पर उन्हें जाने दिया गया।
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भिवानी में भी कुछ इसी तरह का मामला सामने आया। कलानौर स्थित गांव उण से सुबह शैलेंद्र की बारात चली और जसिया गांव जाने के लिए जींद रोड पर जाम में फंस गई। सुंदरपुर पहुंचे तो वहां भी आंदोलनकारियों ने रोक लिया। वहीं बैंड वालों को रोककर कई जगह आंदोलनकारियों ने सड़क पर बैंड बजवाना शुरू कर दिया। बैंड वाले परेशान हो गए। परेशान होकर कुछ बारातियों ने तो अपना रास्ता बदल लिया तो बैंड वालों ने वहां से पैदल ही निकलने में भलाई समझी।