देश के लिए जान देने वाले शहीद जवान जसप्रीत सिंह की शहादत पर पंजाब सरकार ने 10 लाख रुपए देने का एलान किया है, ऐसे में एक सवाल जरूर उठता है।
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Martyr Jaspreet Singh
सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भारतीय सेना के जवान शहीद जसप्रीत सिंह के छोटे भाई को पुलिस में नौकरी और परिजनों को दस लाख रुपये मुआवजा देने का एलान किया है। ऐसे में एक सवाल जरूर उठता है कि जब खिलाड़ियों को करोड़ों दिए जा सकते हैं तो शहीद जवानों के परिवारों को क्यों नहीं?
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Martyr Jaspreet Singh
24 वर्षीय जसप्रीत मंगलवार पाकिस्तान की ओर से फायरिंग के दौरान जम्मू कश्मीर के नौशहरा सेक्टर में शहीद हो गए थे। वह आठ सिख लाइट इन्फैंट्री से संबंधित थे और इस समय राष्ट्रीय रायफल्स के साथ थे।
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Martyr Jaspreet Singh
जम्मू-कश्मीर में एलओेसी के पास पाकिस्तानी गोलीबारी में शहीद जवान जसप्रीत सिंह की देह बुधवार शाम गांव तलवंडी मल्लियां पहुंची।
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भारतीय जवान जसप्रीत सिंह शहीद
इस दौरान अंतिम दर्शनों के लिए भीड़ उमड़ पड़ी। शहीद जवान को नम आंखों से अंतिम विदाई दी गई।
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Martyr Jaspreet Singh
इस दौरान सेना की टुकड़ी की ओर से सलामी दी गई। शहीद के माता, पिता, बहन, भाइयों और रिश्तेदारों का रो-रोकर बुरा हाल था।
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Martyr Jaspreet Singh
शहीद जवान दलित परिवार से संबंधित था। जसप्रीत करीब एक साल पहले अपनी बहन की शादी मौके गांव आऐ थे।
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Martyr Jaspreet Singh
अब उनकी बदली जालंधर में हो गई थी। जवान ने 29 जुलाई को माता-पिता से मिलने आना था। वह परिवार में 2 भाई और दो बहनों के अलावा माता-पिता को छोड़ गया है।
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Martyr Jaspreet Singh
इस मौके उन्होंने मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की ओर से शहीद के परिवार को 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता और परिवार के एक सदस्य को पंजाब पुलिस में नौकरी देने का एलान भी किया।
सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि सीएम ने शहीद के परिवार केलिए पांच लाख रुपये जंगी दुर्घटना मुआवजा और पांच लाख रुपये आम मुआवजे के रूप में मंजूर किए हैं। जसप्रीत मोगा के रहने वाले थे। वह अपने पीछे दो भाई और दो बहनें छोड़ गए हैं। दस लाख रुपये के अलावा परिवार को अंतिम संस्कार केलिए 25 हजार रुपये दिए गए हैं।