नाइजीरिया के पास अपहृत मालवाहक समुद्री जहाज को मुक्त होने के बाद इंजीनियर जय सिंह अपने घर सकुशल लौट आए हैं। मंगलवार देर शाम जय सिंह अपने गांव डेरोली अहीर पहुंचे। उनके पहुंचने पर परिवार के लोगों ने एक साथ नए साल का जश्न मनाया। बता दें कि मालवाहक जहाज का 3 दिसंबर की रात को अपहरण किया गया था।
सभी अपहृत 18 भारतीयों को 21 दिसंबर को मुक्त करा लिया गया था। गांव पहुंचे जय सिंह ने बताया कि वह मुंबई की एग्लो ईस्टर्न शिप मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में बतौर मर्चेट नेवी थर्ड ग्रेड इंजीनियर के पद तैनात हैं। 3 दिसंबर की रात वे नाइजीरिया से जहाज में पेट्रोल लेने गए थे। नाइजीरिया तट के पास पहुंचे तो समुद्री लुटेरे जहाज से वहां आ गए।
समुद्री लुटेरे लगभग 30 से 40 की संख्या में थे और वे आधुनिक हथियार से लैस थे। जय सिंह ने बताया कि उन्होंने उनके जहाज को घेर लिया और फिर समुद्री लुटेरे जहाज में सवार सभी लोगों को घने जंगल में ले गए। वहां पर उनको बंदी बनाकर रखा गया। लुटेरे बंदी बनाए गए लोगों को खाने में केवल एक समय चावल ही देते थे।
चावल के साथ दाल व सब्जी आदि कुछ नहीं देते थे। जय सिंह ने बताया कि 21 दिसंबर को उनको छोड़ दिया गया था। इसके बाद नाइजीरिया सरकार ने उनका मेडिकल कराने के साथ अन्य कार्यवाही पूरी कराई। इसके बाद 29 दिसंबर को वह मुंबई पहुंचे। जहां उनका दोबारा मेडिकल किया गया। इसके बाद 31 दिसंबर की शाम वह अपने घर पर पहुंचे।
अपने बेटे को सकुशल देखकर उनके परिजन बेहद खुश नजर आए। उन्होंने जय के साथ नया साल मनाया। जय सिंह के पिता सुरेंद्र सिंह ने कहा कि नए साल पर उनका बेटा घर आया गया, यह उनके लिए नववर्ष का सबसे बड़ा उपहार है। पीड़ितों को किस तरह की यातनाएं दी गईं इस बारे में जय सिंह ने कोई भी जानकारी देने से इनकार कर दिया। जय सिंह ने समुद्री लुटेरों की मांग पूरी होने के बारे में भी कोई जानकारी नहीं दी।
तीन दिसंबर को नाइजीरिया के पास समुद्री लुटेरों ने मालवाहक जहाज का अपहरण कर लिया था। उसमें सवार 19 लोगों में 18 भारतीय थे। उन भारतीयों में महेंद्रगढ़ के गांव डेरोली अहीर निवासी जय सिंह भी था। जय सिंह 2015 से मुंबई की एग्लो ईस्टर्न शिप मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में बतौर मर्चेट नेवी थर्ड ग्रेड इंजीनियर के पद तैनात हैं।