अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस के मौके पर हम आपको बता रहे हैं उस लड़की के बारे में जो देश में डिजिटल क्रांति की मिसाल बन गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी उसकी सराहना कर चुके हैं।
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मिस्बा हाशमी
- फोटो : अमर उजाला
हरियाणा के यमुनानगर जिले के बुडिया गांव में कॉमन सर्विस सेंटर(सीएससी) चलाने वाली मिस्बा हाशमी डिजिटल क्रांति में एक मिसाल है। वह हरियाणा की एकमात्र वीएलई हैं, जिनसे प्रधानमंत्री ने सीधे बातचीत की और उसे युवा एंटरप्रेन्योर के लिए देश का रोल मॉडल कहा। राष्ट्रीय स्तर पर दिल्ली में आयोजित सम्मेलन में केंद्रीय मंत्री रवि शंकर प्रसाद भी अवार्ड देकर मिस्बा को सम्मानित कर चुके हैं।
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मिस्बा हाशमी
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दिल्ली के लाल बहादुर शास्त्री कॉलेज में विद्यार्थियों को केस स्टडी के रूप में मिस्बा की सफलता की कहानी पढ़ाई जा रही है। साथ ही भारत सरकार के पोर्टल पर उनकी सफलता का वीडियो भी अपलोड किया गया है। ग्रामीण पृष्ठभूमि और अल्पसंख्यक समुदाय से होने के चलते शुरूआत में उन्हें सामाजिक चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा, लेकिन मिस्बा साहस और दृढ़ संकल्प के साथ सभी चुनौतियों का सामना कर रही हैं।
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मिस्बा हाशमी
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नौकरी छोड़ छह साल पहले खोला सीएससी सेंटर
कंप्यूटर साइंस से स्नातक मिस्बा के पिता मोहम्मद इरशाद हाशमी व्यापारी हैं और मां रिटायर्ड शिक्षक हैं। वह अपनी तीन बहनों में सबसे छोटी हैं। 2013 में डिग्री पूरी होने के बाद उन्होंने एक प्राध्यापिका के रूप में काम करना शुरू कर दिया, लेकिन डिजिटल इंडिया मिशन के तहत जब उसे अटल सेवा केंद्रों के बारे में पता चला तो उसने अपनी नौकरी छोड़ दी और वर्ष 2014 में उसने सीएससी केंद्र स्थापित किया। वह हरियाणा की शीर्ष वीएलई हैं। अब वह सीएससी चलाने के साथ-साथ हर महीने गांव की 100 लड़कियों को निशुल्क सैनिटरी पैड भी वितरित करती हैं।
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मिस्बा हाशमी
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ग्रामीण इलाके में अनपढ़ और बुजुर्ग लोगों का सहारा बनीं
मिस्बा ने बताया कि अशिक्षित, गरीब और वृद्ध व्यक्ति मेरे सीएससी सेंटर में आते हैं, उनके चेहरे पर खुशी देखकर मुझे बहुत संतोष होता है। सीएससी के रूप में मुझे ऐसा विशाल मंच मिला, जिसके द्वारा पैसा और समाज सेवा दोनों कमाया जा सकता है। वह डिजी-पे के माध्यम से ग्रामीणों को पेंशन वितरण सुविधा प्रदान करा रही हैं। एक दिन में उन्होंने डिजी-पे के तहत रिकार्ड 5 लाख रुपये के लेनदेन किए हैं।
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मिस्बा हाशमी
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मिस्बा ग्रामीणों को डिजी-पे के माध्यम से नकदी, किसान सब्सिडी भुगतान और पेंशन भुगतान में मदद करती हैं। वर्तमान में वह सीएससी पोर्टफोलियो के तहत सभी सेवाएं प्रदान कर रही हैं। उन्होंने बताया कि वह कंप्यूटर साइंस से स्नातक है तो आईटी कंपनियों में आसानी से नौकरी मिल सकती है, लेकिन खुद का काम करने की ठानी और चुनौतियों को पार करते हुए एंटरप्रेन्योर बन गई। इसलिए मैंने अपने बायो में खुद को एक्सीडेंटल एंटरप्रेन्योर कहा है।
जिन्होंने उंगुली उठाई, वहीं करते हैं सराहना
मिस्बा का कहना है कि पिताजी ने सीएससी खोलने का आइडिया दिया, लेकिन उन्होंने भी शाम पांच बजे तक घर आने की बात कही। लड़की होने के नाते काफी बंदिशें थीं, लेकिन गांव के लोग दिन में अपना काम करते थे और पांच बजे के बाद सीएससी में आते थे। ऐसे में कई बार आधी रात तक लाइन में लगे ग्रामीणों के काम किए। मेहनत देखकर परिवारवालों ने हौसला बढ़ाया तो मेरी हिम्मत बढ़ गई। जो लोग शुरुआत में काम पर उंगुली उठाते थे, अब वे ना केवल उसकी सराहना करते हैं, बल्कि अपनी बेटियों को भी काम करने की छूट देने लगे हैं।