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तिरंगे का अपमान: देश का सबसे उंचा झंडा फटा तो रफ्फू कर फिर से लहरा दिया

Wed, 05 Apr 2017 05:49 PM IST
रमेश शुक्ला ‘सफर’/अमर उजाला, अमृतसर
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राष्ट्रीय ध्वज - फोटो : File Photo
देश के सबसे उंचे तिरंगे का अपमान हुआ है। राष्ट्रीय ध्वज के फटने के बाद उसे रफू कर फिर से लहरा दिया गया, जानिए पूरा मामला...
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अटारी बॉर्डर पर देश का सबसे ऊंचा तिरंगा फहराया गया - फोटो : File Photo
अटारी बॉर्डर पर देश का सबसे ऊंचा तिरंगा पांचवीं बार फटने के बाद भी लहरा रहा है। सोमवार को इसके पांचवीं बार फटने की खबर सामने आई । पता चला है कि जब यह राष्ट्रीय ध्वज चौथी बार फटा था, तब रफू कर उसे दोबारा फहरा दिया गया। इसके बाद सोमवार को तेज हवा और रात में बारिश के कारण यह एक बार फिर फट गया इसके बावजूद उसे उतारा नहीं जा सका।
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अटारी बॉर्डर पर देश का सबसे ऊंचा तिरंगा फहराया गया - फोटो : फाइल फोटो
यह तिरंगा बीते पांच मार्च को तत्कालीन निकाय मंत्री अनिल जोशी ने फहराया था। अब इस तिरंगे को लेकर सियासत तेज हो गई है। कानून के जानकार कह रहे हैं कि जिन अधिकारियों को तिरंगे की देखभाल की जिम्मेदारी दी गई है या जिस कंपनी ने तिरंगा फहराने का ठेका ले रखा था, उनके खिलाफ राष्ट्रीय ध्वज के अपमान के मामले में केस दर्ज हो सकता है।

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अटारी बॉर्डर पर देश का सबसे ऊंचा तिरंगा फहराया गया - फोटो : File Photo
नगर सुधार ट्रस्ट के पूर्व चैयरमैन सुरेश महाजन ने कहा कि रफू किया गया तिरंगा फहराना वैसे ही कानूनन अपराध है। तिरंगा फहराने से लेकर टेंडर तक की जांच के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। वहीं, पंजाब कांग्रेस के पूर्व प्रवक्ता मंदीप सिंह मन्ना ने कहा कि तिरंगा फहराने वाले पूर्व निकाय मंत्री अनिल जोशी और उनके साथियों पर मामला दर्ज होना चाहिए। साथ ही इसकी सीबीआई जांच होनी चाहिए।
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- फोटो : फाइल फोटो
तिरंगे के अपमान पर 10 साल तक की सजा का प्रावधान
एडवोकेट संदीप गोरसी (कानूनी सलाहकार, पंजाब कांग्रेस) ने बताया कि देश का सबसे ऊंचा तिरंगा रफू कर फहरा दिया गया, इससे अधिक बेबसी क्या होगी। अगर राष्ट्रीय ध्वज की उचित देखभाल नहीं कर सकते थे तो उसे फहराना ही नहीं चाहिए था। कानून की किताब में ऐसे मामले में तीन से दस साल की सजा और जुर्माना का प्रावधान का उल्लेख है।
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- फोटो : File Photo
आई थी 3.5 करोड़ की लागत
सीमा पर देश का सबसे ऊंचा तिरंगा फहराने में 3.5 करोड़ की लागत आई थी।  होशियारपुर की भारत कंपनी को इसका ठेका दिया गया था। तिरंगे की चौड़ाई 80 फुट और लंबाई 120 फुट है। वहीं इसके पोल का वजन 55 हजार किलो है। राष्ट्रीय ध्वज को फहराने के लिए मुंबई से स्पेशल क्रेन मंगवाई गई थी।
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- फोटो : फाइल फोटो
यह कहता है नियम 
भारतीय ध्वज संहिता-2002 को 26 जनवरी 2002 से लागू किया गया। उसमें स्पष्ट लिखा गया है कि फटा या मैला झंडा नहीं फहराया जा सकता। जब झंडा फट जाए या मैला हो जाए तो उसे एकांत में पूरा नष्ट किया जाए।
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