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6 बेटियां, जिनके सरपंच बनने की कहानी जोश भर देगी

Wed, 13 Jan 2016 09:49 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, चंडीगढ़
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हरियाणा में पंचायत चुनाव के पहले चरण में कई बेटियां बिल्कुल विपरीत परिस्थितियों में सरपंच बनी हैं। देखिए, ऐसी 6 बेटियों की कहानी।
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6 बेटियां, जिनके सरपंच बनने की कहानी जोश भर देगी

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बर्गर बेचने वाली बनी सरपंच: हरियाणा के फतेहाबाद जिले के चपलामोरी गांव की सरपंच रेखा। पिता बंसीलाल दिहाड़ी मजदूर हैं। करीब 15 दिन पहले तक यह सांवली सी युवती चंडीगढ़ में बर्गर किंग रेस्टारेंट पर काम करती थी और आज इस गांव की सरपंच बन गई। पहली बार सितंबर में नामांकन इस वजह से रद्द कर दिया गया की उम्र 21 साल पूरी नहीं हुई थी। इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने शैक्षणिक योग्यता लागू करने को लेकर पंचायत चुनाव पर स्टे लगा दिया।
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दिसंबर में जब सुप्रीम कोर्ट ने शैक्षिक योग्यता सहित सभी शर्तों को लागू करते हुए चुनाव को हरी झंडी तब तक रेखा 21 बरस की हो चुकी थी। सरपंच पद के लिए आवश्यक आयु योग्यता पूरी होती ही रेखा ने गांव आकर एससी आरक्षित सीट पर सरपंच के लिए नामांकन भर दिया। नतीजा आया तो गांव वालों ने उसे सिर आंखों पर बिठा लिया। रेखा ने 1001 वोटों में से 610 मत हासिल किए। उसकी निकटतम प्रतिद्वंद्वी निर्मल को 394 वोट मिले। (तस्वीर में रेखा दाएं ख्‍ाड़ी हैं)

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दुल्हन बनी सरपंच: शर्तों के कारण मां चुनाव नहीं लड़ पाई तो दिल्ली पुलिस के सिपाही ने नामांकन से ठीक पहले लव मैरिज की और एमएससी पास बहू को मैदान में उतार दिया। गांधरा गांव ने भी पढ़ी लिखी बहू का खूब साथ दिया और नई नवेली दुल्हन को चौधर का हार पहना दिया। सोनू को चट मंगनी और पट ब्याह की रणनीति से कामयाबी मिली और जीवनसाथी के साथ चौधर भी मिल गई। रजनी मैथ से एमएससी, बीएड और नेट पास हैं।
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पहले जन्मा बेटा, एक वोट से जीतीं: कैथल के गांव डेरा गदला में चुनाव से एक दिन पहले वीरपाल कौर ने बेटे को जन्म दिया तो अगले ही दिन एक वोट से सरपंच पद का चुनाव जीतकर परिवार को दोहरी खुशियां दीं। पूर्व सरपंच साहब सिंह विर्क की पुत्रवधू वीरपाल चुनाव मैदान में डटी थीं। गर्भवती होने के कारण वह प्रचार में नहीं जा सकी। शनिवार को ही उसने बेटे को जन्म दिया। एमकॉम पास वीरपाल कौर महज एक वोट से विजयी घोषित हुईं।
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मां बनने के महज 4 घंटे बाद सरपंच: कैथल के गांव मालखेड़ी में पहली बार एससी आरक्षित सीट पर पूनम देवी तो सरपंच बनी ही, चुनाव परिणाम के महज चार घंटे बाद जन्मा उसका बेटा भी सरपंच बन गया। दरअसल पूनम देवी ने वोट डालने के बाद दोपहर एक बजे बेटे को जन्म दिया। इसके चार घंटे बाद चुनाव परिणाम में वह विजयी घोषित होकर सरपंच बन गई। जीत की खुशी में परिजनों ने बेटे का नाम भी सरपंच रख दिया।
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22 साल की सरपंच: गुड़गांव के सिंगार पंचायत में चुनी गई आमना केवल 22 साल की हैं। आमना कहती हैं, ‘यह सुनकर बहुत दुख होता है कि हरियाणा का मेवात इलाका राज्य में सबसे पिछड़ा क्षेत्र है। यहां अशिक्षा है। लोग यहां आने से डरते हैं। इस धब्बे को मिटाना मेरा लक्ष्य है। मैं राजनीति का स्वरूप बदलना चाहती हूं।’ आमना अविवाहित हैं।आमना अविवाहित हैं। आमना कम्प्यूटर में बीटेक क्वालिफाइड हैं।
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गोरखपुर की बेटी बनी सरपंच: दूसरे प्रदेशों से ब्याह कर लाई गई बहु को एससी सीट पर चुनाव लड़ाने की रणनीति कामयाब रही। एससी के लिए रिजर्व इन गांवों में सवर्ण परिवार में ब्याह कर आई इस बहु ने अपनी पिता की जाति के आधार पर चौधर की ताल ठोंकी थी। रोहतक जिले के गद्दी खेड़ी गांव में गोरखपुर से ब्याह कर लाई गई बहू मीना को चौधर का ताज पहना भी दिया। मीना ने गांव के 8 एससी उम्मीदवारों को हराकर जीत हासिल की।
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