देश के सैन्य बेडे़ में नौसेना का प्रथम वायुयान वाहक पोत विक्रांत दो दशक बाद फिर से लांच किया जाएगा। यह खुलासा सेना के बड़े अफसरों ने किया।
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आईएनएस विक्रांत
21वें राष्ट्रीय युवा महोत्सव में बाबा मस्तनाथ विश्वविद्यालय में लगी रक्षा प्रदर्शनी में कई आधुनिक हथियारों को दिखाया गया है। प्रदर्शनी में शामिल होने आए सेना और अर्द्ध सैनिक बलों के अधिकारियों ने अमर उजाला से बातचीत में कई हथियारों के बारे में जानकारी दी।
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आईएनएस विक्रांत
अफसरों ने बताया कि देश की निगहबानी और सुरक्षा की कमान संभाल रही जल, थल एवं वायु सेना लेकर अर्द्ध सैनिक बलों को जल्द ही और अधिक मजबूत किया जाएगा। कई आधुनिक हथियारों से इन्हें मजबूत बनाया जाएगा। वायुसेना को फ्रांस का राफेल विमान मिलने जा रहा है। यह विमान हवा में ही दुश्मनों के छक्के छुड़ा देगा। इनके अलावा कई अन्य अत्याधुनिक हथियार बेडे़ में शामिल होने जा रहे हैं।
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आईएनएस विक्रांत
विक्रांत नौसेना का प्रथम वायुयान वाहन पोत था। इस पोत को वर्ष 1957 में ब्रिटेन से खरीदा गया था। तब इसे एचएमएस हर्क्युलिस के नाम से जाना जाता था। साल 1961 में इसे नौसेना में शामिल किया गया। 31 जनवरी 1997 को इसे काम से हटा दिया गया। कमांडर अभिमन्यु आर्य ने बताया कि नौसेना दो दशक बाद फिर विक्रांत को लांच करने जा रही है। अगले कुछ वर्षों में इसे नौसेना में शामिल कर लिया जाएगा।
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आईएनएस विक्रांत
फिलहाल, नौसेना के पास विक्रमादित्य समेत कई बड़े जहाज हैं। इसमें मिसाइल डिस्ट्रोयर सबसे महत्वपूर्ण है। डिस्ट्रोयर की लंबाई करीब 164 मीटर है और वजन 6400 किलोग्राम है। इसके अगले हिस्से में एके-100 मेनडानशिप है जो 25 किलोमीटर तक गोला दाग सकती है। पिछले हिस्से में हेलीपैड बनाया गया है, जहां हर वक्त हेलिकाप्टर उपलब्ध रहता है। आपात स्थिति में हेलिकाप्टर की मदद ली जाती है।
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इंडियन एयरफोर्स राडार अपग्रेडेशन सिस्टम
वायुसेना के पास एसयू 30 एमके-1 और मिराज जैसे फाइटर प्लेन हैं। इसके अलावा ट्रांसपोर्ट में सी-17, आईएल-76 और आईएल-78 आदि ट्रांसपोर्ट के बड़े जहाज हैं। इनकी खासियत यह है कि यह हवा में ही एक प्लेन से दूसरे में रिफलिंग कर देते हैं। इसके अलावा हाल ही में अमेरिका से सी-130 जहाज भी मंगाया गया है, जो हिंडन बेस में पहुंच गया है। यह एडवांस वर्जन है।
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इंडियन एयरफोर्स
स्क्वाड्रन लीडर विजय राणा ने बताया कि जल्दी ही वायुसेना में राफेल लड़ाकू विमान फ्रांस से मंगाया जा रहा है। वायुसेना के खेमे में 36 जहाज शामिल होंगे, जो पूरी तरह से आधुनिक तकनीक से लैस होंगे और दुश्मनों का चंद मिनटों में खात्मा करने में सक्षम होंगे। बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (बीएसएफ) के बेड़े में फिलहाल एक से बढ़कर एक हथियार हैं।
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इंडियन एयरफोर्स
इजराइल से मंगाई गई एक्स-95 वैपन रात में भी टारगेट को आसानी से निशाना बना लेता है। इसमें सेंसर के साथ ही टार्च भी लगी है। अधिकारियों की मानें तो जल्द ही बीएसएफ को इटली से 9एमएम बैराटा मशीनगन मिलने वाली है। इसका अभी ट्रायल चल रहा है। इसकी खासियत यह होगी कि यह मैकेनिकल सेफ्टी से लैस होगी। मसलन, कई बार हथियार हाथ से छूटने या भूलवश चल जाते हैं, लेकिन बैराटा में ऐसा नहीं होगा।
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भारतीय सेना
रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) दंगा नियंत्रण में इस फोर्स की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। हाल ही में इसमें थ्री नॉट थ्री लैस लीथल लांचर शामिल किया गया है। यदि किसी स्थान पर भीड़ बेकाबू हो रही है तो पैरों का निशाना बनाकर इसकी गोली दागी जाती है। छोटी से गोली में राई की तरह की कई गोलियां होती हैं। जिससे केमिकल निकलता है, जो व्यक्ति के शरीर में फैल जाते हैं। इससे व्यक्ति को दर्द के साथ शरीर में जलन महसूस होगी। लेकिन कोई चोट नहीं लगेगी। इससे भीड़ को नियंत्रित करने में मदद मिलती है।
आरएएफ को भी जल्दी ही शॉक सिल्ड मिलने जा रही है। अभी तक खुद को बचाने के लिए आरएएफ जो सिल्ड इस्तेमाल करती है उससे केवल पत्थर और डंडे से बचा जा सकता है, लेकिन शॉक सिल्ड से सामने वाले व्यक्ति को करंट लगेंगे। यदि भीड़ में किसी वीआईपी के लिए रास्ता बनाना है या भीड़ को पीछे हटाना है तो उस पर डंडा चलाने की बजाय जवान इसका इस्तेमाल कर सकता है। बिना डंडा चलाए करंट लगते ही भीड़ पीछे हट जाएगी।