काबुल में आतंकवादियों के हमले में मारे गए यूएन मिशन से जुड़े राजेश कुमार भट्टी का शव करीब साढ़े दस बजे सेक्टर 45 स्थित उनके घर पर पहुंचा। शव को देखते ही बेटे, बेटी और अन्य परिजनों की आंखों से आंसू फूट पड़े। यह देख वहां मौजूद सभी लोगों की आंखें नम हो गईं।
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मिशन पर गए थे काबुल, ताबूत में लौटे जनरल, तस्वीरें
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एयरफोर्स के विमान की मदद से उनका शव शुक्रवार को काबुल से नई दिल्ली एयरपोर्ट लाया गया। वहां से एंबुलेंस की मदद से सड़क के रास्ते चंडीगढ़ लाया गया। राजेश के बेटे नवीन ने बताया कि शाम चार बजे उनके पिता का शव दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचा। वहां से करीब साढ़े चार बजे एंबुलेंस से रवाना हुआ।
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सेक्टर-45 सी के हाउस नंबर-2045 निवासी राजेश कुमार भट्टी (64) की मौत काबुल के शहर-ए-नाव स्थित पार्क पैलेस में एक आतंकी हमले के दौरान हुई थी। आतंकी हमले कुल नौ लोग मारे गए थे, इनमें दो भारतीय थे। राजेश कुमार पार्क पैलेस में अपने साथियों के साथ ठहरे हुए थे।
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वे यूएन मिशन के तहत अफगानिस्तान में आडिटर के तौर पर काम करने के लिए इसी साल 16 जनवरी को गए थे। उनके दो बेटे व एक बेटी हैं। एक बेटा चंडीगढ़ में और दूसरा बेटा यूएसए में रहता है, जबकि बेटी दिल्ली में रहती हैं।
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राजेश के बेटे नवीन भट्टी ने बताया कि वे पिछले साल भी अफगानिस्तान जाना चाहते थे, लेकिन आतंकी घटनाओं को देखकर उन्होंने अपने पापा को रोक लिया था। इस साल दोबारा ऑफर मिला तो पापा की जिद की आगे उन्हें झुकना पड़ा। उन्हें 27 जून को वापस आना था। इससे पहले ही उनकी मौत की खबर मिल गई। वे एकाउंट जनरल पंजाब के दफ्तर से डिप्टी एकाउंट जनरल के पद से साल 2011 में रिटायर हुए थे।
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राजेश कुमार के दोस्त एसपी मल्होत्रा ने बताया कि उनके हम उम्र्र दोस्तों का एक ग्रुप बना हुआ था। सभी सीनियर सिटीजन थे। राजेश हम सबके ग्रुप लीडर थे। हम लोग अक्सर बुधवार को मिलते थे। युवाओं की तरह पूरा ग्रुप मस्ती करता था। कभी किसी रेस्टोरेंट में जाते तो कभी किसी पिकनिक स्पॉट में।
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पिछले साल पूरे ग्रुप को लेकर वे कसौली गए थे। कसौली में सभी साथियों को होटल में ठहरने और गाड़ियों का इंतजाम भी राजेश कुमार ने किया था। आसपड़ोस के लोगों का कहना था कि वे काफी जिंदादिल इंसान थे।