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पिता की कड़ी मेहनत ने बेटी को बनाया ऐसा चैम्पियन कि रच दिया इतिहास, इंटरव्यू

Thu, 30 Nov 2017 05:12 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हिसार(हरियाणा)
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रानी रामपाल - फोटो : SELF
पिता घोड़ागाड़ी हांकते हैं और बेटी ने ऐसा इतिहास रच दिया कि पूरी दुनिया ने सराहा। देश को एशिया का चैम्पियन बनाने वाली इस बहादुर बेटी का इंटरव्यू पढ़ेंगे तो गर्व होगा।
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रानी रामपाल - फोटो : sportstarlive
बात हो रही है, देश को 13 साल बाद हॉकी का एशिया कप जिताने वाली कप्तान रानी रामपाल की। हरियाणा के शाहबाद की यह बेटी बुधवार को हिसार में राजगढ़ रोड स्थित एस्ट्रोटर्फ ग्राउंड पर चल रही राज्य स्तरीय महिला हॉकी चैंपियनशिप में खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाने पहुंची। यहां उन्होंने कहा कि मेरी सफलता का श्रेय पिता को जाता है, उनकी मेहनत का रिजल्ट है मेरी ये उपलब्धि।
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भारतीय महिला हॉकी टीम की कैप्टन रानी रामपाल
रानी रामपाल ने कहा कि ओलंपिक के क्वालीफाई करना टारगेट था, पूरा कर लिया। अब टारगेट है 2018 में अप्रैल महीने में ऑस्ट्रेलिया में होने वाली कॉमनवेल्थ गेम्स और जुलाई में वर्ल्ड कप। एशिया कप में जीत हासिल की, पर टीम इंडिया ने कई सबक भी लिए। अब वीक लाइन पर काम करने की जरूरत है। रानी रामपाल ग्राउंड पर लगातार मेहनत को ही जीत का आधार मानती हैं।

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hockey player rani rampal - फोटो : amarujala
रानी ने कहा कि टीम इंडिया को डिफेंस लाइन पर और काम करना होगा। मॉडर्न हॉकी पर भी बात होनी चाहिए। हमारे यहां इसका कल्चर कम है। नेशनल व इंटरनेशनल स्तर पर ले जाने के लिए इस पर ध्यान देना जरूरी है। हरियाणा सरकार अन्य प्रदेशों के मुकाबले में खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं दे रही है। मेडल का नाम एक है चाहे वह खिलाड़ी को मिले या टीम को। उन्हें भी उसी पद की नौकरियां दी जानी चाहिए।

 
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hockey player rani rampal - फोटो : amarujala
रानी ने कहा कई अच्छे खिलाड़ी आर्थिक तंगी के कारण खेल छोड़ने को मजबूर हो जाते हैं। इसलिए सरकार को चाहिए कि ज्यादा से ज्यादा सरकारी नौकरियां दे। रानी रामपाल कहती हैं कि फिल्म में जो दिखाया जाता है, वास्तविकता उससे बहुत अलग होती है। खेल के प्रति रुचि अभिनेता से नहीं, परफोर्मेंस से बनती है। जहां तक हॉकी का सवाल है तो प्रदेश में 7-8 एस्ट्रोटर्फ ग्राउंड होने चाहिए।
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hockey player rani rampal - फोटो : amarujala
आज कोई भी युवा यदि क्रिकेटर बनना चाहता है तो उसका प्रेरणा स्रोत कोई अभिनेता का नहीं, बल्कि सचिन तेंदुलकर, महेंद्र सिंह धोनी, युवराज सिंह, विराट कोहली होते हैं। खिलाड़ियों को खेल के साथ अपनी डाइट पर भी ध्यान देना चाहिए। अपनी एजुकेशन को भी बढ़ाना चाहिए। शिक्षा के अधिकार के साथ खेल का अधिकार भी लागू होना चाहिए। ताकि स्पोर्ट्स कल्चर डेवलप हो।
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