घोड़ागाड़ी पर माल ढोने का काम करने वाले की बेटी ने सिर्फ ओलंपिक में देश का नाम रोशन किया, ब्लकि अब उसे अर्जुन अवार्ड भी मिलेगा। देखिए, ये रिपोर्ट।
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hockey player rani rampal
- फोटो : amarujala
बात हो रही है, भारतीय महिला हॉकी टीम की फास्ट फॉरवर्ड प्लेयर रानी रामपाल की। महिला हॉकी में हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले की रानी रामपाल को अर्जुन अवॉर्ड नवाजा जाएगा। गरीबी और कम संसाधनों के बावजूद भी रानी रामपाल ने भारतीय हॉकी टीम तक का सफर तय किया है। रानी के पिता आज भी शाहाबाद कस्बे में घोड़ा गाड़ी चलाते हैं। रानी रामपाल को इस बात की जरा भी हिचक नहीं है कि उसके पिता आज भी मजदूरी करते हैं। बल्कि उसे अपने पिता पर गर्व है।
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rani rampal father
- फोटो : amarujala
बेटी को इतनी शोहरत मिलने और पैसा भी आने के बावजूद पिता आज भी जमीन से ही जुड़े हैं। यही घोड़ागाड़ी चला कर उन्होंने परिवार का गुजर बसर किया। इसी से अपनी बेटी के हॉकी खेलने के सपने को साकार किया और टीम इंडिया के साथ उसका रियो तक का सपना पूरा कराया। रियो ओलंपिक में भारत और जापान की महिला हॉकी टीम का मैच दो-दो की बराबरी पर छूट गया। एक समय ऐसा लग रहा था कि भारत यह मैच हार जाएगा, लेकिन आखिरी वक्त में मैच ड्रॉ हो गया।
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hockey player rani rampal
- फोटो : amarujala
मैच को बराबरी पर लाने में उनकी बेटी रानी रामपाल की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। यह खुशी का माहौल नवजोत के घर पर भी था। बस थोड़ी मायूसी इस खातिर थी कि इंडिया मैच नहीं जीता। पिता पर गर्व है, इसीलिए इस स्टार खिलाड़ी ने अपने नाम के साथ अपने पिता का भी नाम लगा रखा है। आज वह विश्व में रानी रामपाल के नाम से ही प्रसिद्ध है। द्रोणाचार्य अवार्डी कोच बलदेव सिंह के ट्रेनिंग और अपनी इसी जिद के बदौलत ही रानी ने सफलता के शिखर को छुआ।
अपने प्रदर्शन की बदौलत ही रानी ने रेलवे में क्लर्क की नौकरी हासिल की थी और टीम के साथ-साथ परिवार की जिम्मेदारी भी संभाली थी। रानी की हॉकी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि उसका हॉकी सैंस बहुत गजब का है और यह बात उसके कोच भी मानते हैं।