हर रोज ट्रेन में सफर करने वालों को रेलवे ने एक तोहफा दिया है। दरअसल, टिकट को लेकर नई गाइड लाइन जारी की गई है, पढ़ लीजिए बड़े काम की है।
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ट्रेन पैसेंजर्स
रेलवे ने रिजर्व कोच में यात्रा करने वाले यात्रियों से लगातार मिल रहीं शिकायतों के बाद यह नई गाइडलाइन जारी की है। इसके तहत अब टीटीई यात्रा के दौरान रात को ट्रेन में सो रहे यात्रियों को जगाकर उनका टिकट चेक नहीं कर पाएंगे।
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टीटीई को रात 10 से सुबह 6 बजे तक यह गाइडलाइन का पालन करना होगा। वहीं रात में टिकट की चेकिंग तभी की जाएगी, जब ट्रेन या तो रात को रवाना होगी या फिर विजिलेंस विभाग को बेटिकट यात्रियों के कोच में होने का संदेह हो।
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रेलवे ने अपने सभी जोन कार्यालयों को इस बाबत निर्देश जारी कर दिए हैं। नए निर्देशों के तहत अब जिस स्टेशन से ट्रेन चलना शुरू होगी वहां टीटीई को एक घंटे पूर्व और जहां से ड्यूटी शुरू होगी वहां आधा घंटा पहले पहुंचना होगा।
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अभी तक जिन लोगों के पास रिजर्वेशन नहीं होता था वे भी टीटीई की मर्जी से रिजर्व कोचों में यात्रा करते थे। अब टीटीई की जवाबदेही होगी कि जितनी सीटें उतने ही यात्री कोच में हों। उससे अधिक यात्री होने पर आरक्षित सीट पर बैठे यात्री को अधिकार होगा कि वह इसकी शिकायत कर सकता है।
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इसके अलावा डिब्बे के दोनों तरफ के दरवाजे रात 10 से सुबह 6 बजे तक बंद रखना और शिकायत पुस्तिका साथ रखना भी टीटीई की नौकरी का हिस्सा होगा।
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ट्रांसफर नहीं होंगे रियायती टिकट
अब कोई भी पैसेंजर यात्रा नहीं कर पाने की स्थिति में कंसेशन वाले टिकट को अपने परिवार के किसी अन्य सदस्य को ट्रांसफर नहीं कर सकेगा। रेलवे में अभी तक यह व्यवस्था थी कि व्यक्ति ब्लड रिलेशन में अपना टिकट ट्रांसफर कर सकता था। हालांकि इसके लिए उसे कुछ नियमों का पालन करना होता था।
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टीटीई को रखना होगा ब्लैक फार्म
रेलवे के नए नियम के अनुसार अगर किसी यात्री को पैंट्री कार के भोजन से शिकायत है तो टीटीई की जवाबदेही होगी कि वह पैंट्री कार से बेहतर भोजन बनवाकर यात्री को उपलब्ध करवाए। इतना ही नहीं, आरक्षित कोच में अपराध होने पर टीटीई डीडीआर लिखवाने के लिए ब्लैक फार्म अपने पास रखेगा।
यह कदम यात्रियों से मिली शिकायतों के बाद उठाया गया है। 85 फीसदी यात्रियों की शिकायत थी कि जब वह थक हारकर गहरी नींद लेना शुरू करते हैं तब टीटीई आकर उन्हें टिकट चैक करने के लिए झकझोर देते हैं। इससे उन्हें परेशानी होती है। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा।
- विनोद कुमार, पीआरओ, रेलवे बोर्ड, नई दिल्ली