इराक के कंस्ट्रक्शन कंपनी में बंधक बनाए गए पंजाबियों समेत 139 भारतीयों के परिवारों के लिए बड़ी खुशखबरी, देखिए तस्वीरों में।
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इराक में बंधक 139 भारतीय रिहा, वतन वापसी आज
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इराक के कंस्ट्रक्शन कंपनी में बंधक बनाए गए पंजाबियों समेत 139 भारतीयों के परिवारों के लिए बड़ी खुशखबरी। दरअसल महीनों से इराक की बसरा सपोर्ट सिटी में स्थित अब्दुल्ला अल जमूरी कंस्ट्रक्शन कंपनी में बंधक बनाए गए पंजाबियों समेत 139 भारतीयों को मुक्त करवा लिया गया है। देर रात इराक में एंबेसी अफसरों की निगरानी में कंपनी से निकाल कर उन्हें बसरा एयरपोर्ट भेज दिया गया।
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यहां से सभी को दुबई ले जाया जाएगा जहां से उन्हें भारत लाया जाएगा। आज देर रात तक इन बंधकों के अपने-अपने घर पहुंचने की उम्मीद है। इराक से रिहा होने वाले इन बंधकों में पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, बिहार व चेन्नई के लोग शामिल हैं। इराक में इंडियन एंबेसी और इमिग्रेशन अफसरों ने सभी बंधकों के जब्त किए गए पासपोर्ट भी कंपनी से वापस दिलवा दिए हैं।
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हालांकि कंपनी ने कुल बकाया वेतन का 30 फीसदी ही कैश ही बंधकों का दिया है। बाकी रकम से कंपनी बंधकों का उधार चुकाएगी। एंबेसी अफसरों से हुई बातचीत में यह तय हो गया है कि यहां सभी बंधकों का दुकानदारों के पास जितना भी उधार है, वह इराकी कंपनी ही चुकाएगी। अगर उधार रकम चुकाने के बाद वेतन बचता है तो कंपनी 10 अप्रैल तक बंधकों के बैंक अकाउंट में पैसा जमा करा देगी।
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सभी बंधकों की वापसी के टिकट का इंतजाम भारत सरकार की ओर से किया गया है। उधर, मुक्त होने पर सभी बंधक खासे उत्साहित हैं और घर लौटने को बेचैन हैं। इराक में करीब दस माह से बंधुआ मजदूरी कर रहे भारतीयों की आवाज सबसे पहले ‘अमर उजाला’ ने उठाई। इसका संज्ञान लेते हुए पंजाब और हरियाणा सरकार ने विदेश मंत्रालय से जल्द इन बंधकों की रिहाई के लिए गुहार लगाई थी।
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इसके बाद विदेश मंत्रालय के निर्देश पर इंडियन एंबेसी ने कंपनी मालिक पर बंधकों की रिहाई के लिए दबाव बनाया। इसी का नतीजा है कि अब 139 बंधक वतन वापसी कर रहे हैं। पिछले दस माह से बंधक बनाए गए भारतीयों की संख्या 181 थी, मगर यूपी के कुछ लोगों को पहले रिहा कर दिया गया था। अब 168 बंधक वहां मौजूद थे।
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इराकी कंपनी की ये साजिश थी कि इन बंधकों को वेतन न देकर यहीं इराक में ही रहने के लिए मजबूर किया जाए। बंधकों की हालत वहां बेहद दयनीय थी। पिछले दस से बारह महीनों से उनसे कंपनी दबाव में बिना वेतन विभिन्न साइटों पर ले जाकर साधारण मजदूरी करवाती थी। यदि बंधक काम के लिए मना करते, तो हवाई फायर से उन्हे डराया जाता था, उनके साथ मारपीट की जाती थी।
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इतना ही नहीं दुकानदारों को कहकर उनका राशन, दवाइयां व अन्य सामान की सप्लाई बंद कर दी जाती थी। आलम यह था कि वहां बंधक मानसिक दबाव में आ रहे थे, इसी मानसिक प्रताड़ना से दो बंधकों की मौत हो चुकी थी और कई मानसिक रोगी बन गए थे। लेकिन अब पिछले कुछ दिनों से इन बंधकों ने कंपनी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था और वतन वापसी की जिद पकड़ ली थी।
139 भारतीय बंधकों की रिहाई के बाद अभी भी 29 भारतीय बंधक ऐसे हैं जो उसकी कंपनी में कुछ दिन और रहेंगे, क्योंकि इन बंधकों का कंपनी की ओर से अभी हिसाब नहीं हो पाया है। कंपनी ने एंबेसी अफसरों को आश्वस्त किया है कि कुछ दिनों में ही इन बंधकों का भी हिसाब कर दिया जाएगा और उन्हें छोड़ दिया जाएगा।