26 गोल दागे और ध्वस्त हो गया 86 साल पुराना रिकॉर्ड। हॉकी में इतिहास की अब तक की सबसे बड़ी जीत और जानते हैं कि देश को एशिया का चैम्पियन बनाने में एक शख्स का बड़ा हाथ रहा।
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रुपिंदर पाल सिंह
ये कोई और नहीं, बल्कि भारतीय हॉकी टीम का हरफनमौल खिलाड़ी रुपिंदर पाल सिंह पाल है, जिनकी बदौलत एशियन गेम्स 2018 में टीम इंडिया ने रिकॉर्ड बनाया। बुधवार को हांगकांग को बुरी तरह से हराने में चंडीगढ़ के रुपिंदर सिंह ने अपना अहम योगदान दिया। रुपिंदर ने बुधवार को खेले गए मैच में 5 शानदार गोल किए, जिसमें 2 फील्ड गोल और 3 पेनेल्टी कार्नर शामिल हैं।
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रुपिंदर पाल सिंह
बता दें कि टीम इंडिया ने अपने ही रिकॉर्ड को ध्वस्त करते हुए एक नया कीर्तिमान स्थापित कर दिया है। हॉकी इंडिया ने हांगकांग को 26-0 से बुरी तरह से रौंद दिया। इस ऐतिहासिक जीत के साथ भारत ने 86 साल पुराने अपने रिकार्ड को भी तोड़ दिया, जो उसने 1932 के ओलंपिक में अमेरिका को 24-1 से हरा कर बनाया था।
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रुपिंदर पाल सिंह
बहरहाल, 2018 में एशियन गेम्स में भारत के लिए बुधवार का दिन सुनहरी अक्षरों में लिखा गया है। भारत ही इस शानदार उपलब्धि पर तीन बार के ओलंपियन गोल्ड मेडलिस्ट बलबीर सिंह सीनियर ने पूरी भारतीय टीम को बधाई दी हैं। उनका कहना है कि एशियन गेम्स में भारत ने जीत का सिलसिला जारी रखा है। अभी तो शुरूआत है असली खुशी तब होगी जब भारत एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीतेगा।
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रुपिंदर पाल सिंह
चंडीगढ़ से सीखी हॉकी की एबीसीडी
रूपिंदर पाल सिंह मूल रूप से पंजाब केरहने वाले है। जब वह 15 साल के थे तो हॉकी सीखने के लिए चंडीगढ़ सेक्टर 42 स्थित हॉकी अकादमी पहुंचे थे। यहां पर कोच जसबीर सिंह बाजवा की देखरेख में रुपिंदर पाल सिंह ने हॉकी की ट्रेंनिग ली। इसकेबाद से इस खिलाड़ी ने अपनी मेहनत केबलबूते से पहले भारतीय जूनियर और उसके बाद सीनियर टीम में जगह बनाई। रुपिंदर पाल सिंह फरीदकोट के रहने वाले हैं। इनके पिता फर्नीचर का काम करते है।
कहा था जीत से करेंगे आगाज...
एशियन गेम्स में जाने से पहले भारतीय टीम में शामिल हुए रुपिंदर पाल सिंह ने बताया था कि इस बार वह एशियन गेम्स में वह जीत के साथ आगाज करना चाहेंगे। इस बात को इस खिलाड़ी ने कर दिखाया।